वाशिंगटन, 19 मई (वार्ता) अमेरिकी कांग्रेस की बजट ऑफिस (सीबीओ) की एक नयी रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भविष्य की राष्ट्रीय मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘गोल्डन डोम’ पर भारी खर्च आएगा। इस पूरे सिस्टम को बनाने और अगले बीस साल तक चलाने में लगभग 1.2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत आएगी। इस हवाई रक्षा सिस्टम का सबसे महंगा हिस्सा अंतरिक्ष में बनेगा। दुश्मन की तरफ से एक साथ आने वाली 10 मिसाइलों को रोकने के लिए भी अमेरिका को अंतरिक्ष में 7,800 सैटेलाइट्स का एक बड़ा नेटवर्क तैनात करना होगा। सिर्फ इस अंतरिक्ष वाली परत पर ही 20 साल में 743 बिलियन डॉलर का खर्च आएगा। शुरुआत में इस योजना को ‘आयरन डोम फॉर अमेरिका’ नाम दिया गया था। इसे बनाने के लिए जारी सरकारी आदेश में कहा गया था कि नए जमाने के आधुनिक हथियारों का खतरा बहुत गंभीर और जटिल हो गया है। यह स्थिति अमेरिका के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो सकती है।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय अब इस योजना पर ‘गोल्डन डोम फॉर अमेरिका’ के नाम से काम कर रहा है। इस बहुस्तरीय सुरक्षा कवच के लिए पूरे अमेरिका में जमीन पर आधारित मिसाइल रक्षा नेटवर्क, रडार सिस्टम, मिसाइल ट्रैक करने वाले उपग्रहों और अंतरिक्ष में तैनात होने वाले हवाई हमले रोकने वाले हथियारों पर भारी निवेश करना होगा। सीबीओ का अनुमान है कि इस सिस्टम को केवल खरीदने की लागत ही एक ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा होगी, जबकि सालाना इसे चलाने का खर्च लगभग 8.3 अरब डॉलर आएगा। इस पूरे सिस्टम का सबसे महंगा हिस्सा अंतरिक्ष में तैनात होने वाले हथियार होंगे, जो कुल खरीद का करीब 70 प्रतिशत होंगे। यह मिसाइल सुरक्षा कवच उत्तर कोरिया जैसे क्षेत्रीय दुश्मनों या रूस और चीन जैसे बड़े देशों के सीमित मिसाइल हमलों से अमेरिका की रक्षा करेगा। हालांकि, सीबीओ ने सचेत किया है कि इतना बड़ा सुरक्षा कवच भी पूरी तरह से ‘अभेद्य’ नहीं हो सकता। अगर कोई बड़ी परमाणु शक्ति पूरे पैमाने पर अमेरिका पर मिसाइलों की बौछार कर दे, तो यह सिस्टम भी नाकाफी साबित हो सकता है।
सीबीओ ने जिस ढांचे का विश्लेषण किया है, उसमें मिसाइल रोकने के लिए चार परतें होंगी: अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स का समूह, जमीन पर ऊपरी व्यापक सुरक्षा परत, जमीन पर ही निचली सुरक्षा परत और पूरे देश में बनाए जाने वाले 35 क्षेत्रीय रक्षा जोन। ऊपरी परत में आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलें होंगी और निचली परत में ‘एजिस एशोर’ नाम की विशेष प्रणालियाँ होंगी। सीबीओ की इस रिपोर्ट ने बजट के अनुमानों को लेकर रक्षा मंत्रालय के दावों और अपने आंकड़ों के बीच एक बड़ा अंतर उजागर किया है। पेंटागन का अनुमान है कि इसे अगले दस साल में केवल 185 बिलियन डॉलर में बनाया जा सकता है, जिसके लिए ट्रंप प्रशासन अगले पांच सालों तक हर साल लगभग 15 बिलियन डॉलर की मांग कर रहा है। सीबीओ का कहना है कि दोनों के आंकड़ों में यह बड़ा अंतर दिखाता है कि या तो रक्षा मंत्रालय बहुत छोटा सिस्टम बना रहा है, या फिर इसका पैसा सेना के दूसरे खातों से निकाला जाएगा। अगर इस प्रणाली से अंतरिक्ष वाले हिस्से को हटा दिया जाए, तो 20 साल का कुल खर्च घटकर 448 बिलियन डॉलर रह जाएगा, लेकिन फिर यह राष्ट्रपति के सरकारी आदेश के मुख्य उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाएगा।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इतने बड़े पैमाने पर मिसाइल रक्षा नेटवर्क खड़ा करने से दुनिया में हथियारों की एक नई होड़ शुरू हो सकती है। इसके जवाब में रूस और चीन जैसे विरोधी देश अमेरिकी रक्षा प्रणाली को नाकाम करने के लिए अपने परमाणु और पारंपरिक मिसाइल भंडारों को और बढ़ा सकते हैं। इसके जवाब में अमेरिका भी अपनी खुद की मिसाइल रक्षा और लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों का दायरा बढ़ाने पर मजबूर होगा। इससे पूरी दुनिया में रणनीतिक तनाव बहुत अधिक बढ़ सकता है। परियोजना के इस विशाल आकार को देखते हुए सीबीओ ने माना है कि इसके लागू होने की समयसीमा, तकनीक की सफलता और भविष्य के खर्च को लेकर अभी भी कई बड़ी अनिश्चितताएं हैं, खासकर अंतरिक्ष में तैनात होने वाली उन तकनीकों को लेकर जिनका अभी तक परीक्षण भी नहीं किया गया है।

