ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी सेना के हथियारों के भंडार में तीव्र गिरावट

वाशिंगटन, 18 मई (वार्ता) ईरान के साथ युद्ध जारी रहने के बीच अमेरिकी सेना के हथियारों के भंडार में तीव्र गिरावट हो रही है जिससे भविष्य के संघर्षों को झेलने के लिए अमेरिकी क्षमता की बढ़ती कमजोरी सामने आ रही है क्योंकि आवश्यकता के अनुरूप उत्पादन की गति धीमी है।

सेवानिवृत्त मेजर जनरल जॉन फेरारी ने चेतावनी दी है कि स्थिति बहुत चिंताजनक हो गई है। श्री फेरारी ने सीबीसी न्यूज़ से कहा कि यह बहुत चिंताजनक है। उन्होंने पहले पेंटागन में कार्यक्रम विश्लेषण एवं मूल्यांकन की देखरेख की थी। उन्होंने कहा, “जिस तरह का युद्ध हम लड़ना चाहते हैं उसके लिए हमारे पास कुछ खास तरह के हथियारों की कमी हो रही है। हमारे पास महंगे एवं बेहतरीन हथियारों की कमी हो रही है और अब हथियारों में कमी एक रणनीतिक खतरे का संकेत है।” वर्तमान में अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट में एक वरिष्ठ फेलो श्री फेरारी ने कहा कि ईरान संघर्ष में गोला-बारूद की खपत का स्तर भविष्य में किसी भी टकराव की स्थिति में, विशेष रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में देश को काफी असुरक्षित बना सकता है।

नौसेना में पूर्व कप्तान रहे डेमोक्रेटिक सांसद मार्क केली ने सीबीसी को बताया, “हमने बहुत सारे गोला-बारूद खर्च कर दिए हैं और इसका मतलब है कि अमेरिकी लोग कम सुरक्षित हैं, चाहे वह पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चीन के साथ संघर्ष हो या दुनिया में कहीं और।” सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज द्वारा किए गए एक हालिया विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ मौजूदा अभियानों को जारी रखने के लिए पर्याप्त मिसाइलें मौजूद हैं लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम सुरक्षा जोखिम के लिए गंभीर साबित हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने युद्ध के पहले 39 दिनों में ही सात प्रमुख सटीक निर्देशित हथियारों में से चार का उपयोग कर लिया होगा। रिपोर्ट में कहा गया है, “हथियारों के कम होते भंडार ने निकट भविष्य में जोखिम उत्पन्न कर दिया है और चेतावनी दी गई है कि भंडार को फिर से भरने में वर्षों लग सकते हैं। इस दबाव का असर पहले से ही यूरोपीय संघ, यूक्रेन और खाड़ी देशों सहित अमेरिकी सहयोगियों पर पड़ रहा है।

पिछले सप्ताह, अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की थी कि ईरान युद्ध के बाद हथियारों की बढ़ती कमी के कारण बाल्टिक देशों को कुछ प्रकार के गोला-बारूद की आपूर्ति में देरी हुई है। पेंटागन ने पूरे संघर्ष के दौरान लंबी दूरी के सटीक हथियारों, इंटरसेप्टर एवं मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर बहुत भरोसा किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों और सांसदों की टिप्पणियों के अनुसार, देश उच्च श्रेणी के निर्देशित गोला-बारूद की बढ़ती कमी का सामना कर रहा है।

हथियारों की कमी की रिपोर्टों को कमतर आंकते हुए अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्वीकार किया कि इन हथियारों की भरपाई में वर्षों लगेंगे जबकि वाशिंगटन ने कथित रूप से शेष भंडार को संरक्षित करने के लिए विदेशी भागीदारों को कुछ मामलों में आपूर्ति प्रक्रिया धीमी कर दी है या रोक दी है। यह समस्या कई वर्षों से पनप रही है क्योंकि यूक्रेन युद्ध ने ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले ही अमेरिका के लंबी दूरी के सटीक हथियारों के भंडार को काफी कम कर दिया था और मौजूदा युद्ध ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है।

पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली प्रणालियों की कमी अंततः अमेरिकी विमानों एवं नौसेना को दुश्मन के ठिकानों के करीब संचालन करने के लिए मजबूर कर सकती है जिससे भविष्य के युद्धों में परिचालन में जोखिम बढ़ जाएगा। फिर भी विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के क्षीण हो चुके शस्त्रागार का पुनर्निर्माण एक बहु-वर्षीय एवं अत्यधिक खर्चीला प्रयास है, भले ही ईरान के साथ लड़ाई जल्द ही समाप्त हो जाए, जो कि फिलहाल असंभव लग रहा है।

 

 

 

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