कोलकाता | पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की विभिन्न सरकारी सेवाओं में भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (अपर एज लिमिट) को बढ़ाने का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कूटनीतिक फैसला लिया है। वित्त विभाग (ऑडिट ब्रांच) द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, ‘वेस्ट बंगाल सर्विसेज़ (एज-लिमिट बढ़ाना) रूल्स, 1981’ में व्यापक बदलाव किए गए हैं। इस नए नोटिफिकेशन के तहत राज्य प्रशासनिक सेवाओं की ग्रुप ‘ए’ (Group A) नौकरियों में सीधी भर्ती के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा को अब बढ़ाकर 41 वर्ष कर दिया गया है। आदेश में कूटनीतिक रूप से यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि पूर्व के किसी नियम या विशिष्ट सेवा के लिए अधिकतम आयु सीमा पहले से ही 41 वर्ष से अधिक निर्धारित है, तो उस पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा और वह पहले की तरह ही लागू रहेगी।
डिजिटल मीडिया पर जारी किए गए इस सरकारी आदेश के मुताबिक, अन्य महत्वपूर्ण संवर्गों के पदों के लिए भी आयु सीमा में कूटनीतिक रूप से भारी ढील प्रदान की गई है। इसके तहत राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले ग्रुप ‘बी’ (Group B) के सभी पदों पर सरकारी सेवा में प्रवेश की ऊपरी आयु सीमा को बढ़ाकर 44 वर्ष कर दिया गया है। इसके साथ ही, शिक्षित बेरोजगार युवाओं के हित में एक और बड़ा ऐलान करते हुए ग्रुप ‘सी’ (Group C) और ग्रुप ‘डी’ (Group D) दोनों ही श्रेणियों की नौकरियों के लिए अब अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 45 वर्ष कर दी गई है। सरकारी सर्कुलर में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग (WBPSC) के दायरे से बाहर, राज्य के वैधानिक निकायों, सरकारी कंपनियों और स्थानीय प्राधिकरणों में भर्ती अधिनियम 1999 के तहत होने वाली नियुक्तियों के लिए भी यही 45 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा मान्य होगी, जिसे 11 मई से आधिकारिक तौर पर प्रभावी माना गया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक ढांचे में यह दूरगामी बदलाव मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित सरकार द्वारा राज्य की बागडोर संभालने के तुरंत बाद लिया गया है। गौरतलब है कि राज्य में हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर दिखाया, जिसमें बीजेपी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के लंबे शासन को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया। केवल 80 सीटों पर सिमटकर मुख्य विपक्षी दल बनी टीएमसी के दौर की रोजगार नीतियों की समीक्षा करते हुए नई सरकार ने युवाओं को कूटनीतिक रूप से साधने और ओवरएज हो रहे अभ्यर्थियों को मुख्यधारा में वापस लाने के उद्देश्य से इस बड़े रोजगारपरक सुधार को अमलीजामा पहनाया है, जिसका राज्य भर के युवा वर्ग में भारी स्वागत किया जा रहा है।

