खत्म होने वाला है पेट्रोल-डीजल का दौर? महंगे तेल के बीच सरकार के पास तैयार है ये 6 विकल्प, पैसे की भी होगी बचत

भारत ही नहीं दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर है। भारत के अलावा एशिया के अन्य देशों में तेल की कीमतें में 50% से अधिक बढ़ी है।

मिडिल ईस्ट में पिछले दो महीने से जारी तनाव का असर अब पूरी दुनिया में देखा जा रहा। ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमते तेजी से भाग रही हैं। इसी का असर का है भारतीय तेल कंपनियों ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी हैं, जो कि शुक्रवार 15 मई से पूरे देशभर में लागू हो गया है। ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए पिछले कुछ समय से भारत सरकार और तेल कंपनियां का काफी नुकसान उठा रही थीं।

इसी नुकसान को कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। तेल की कीमतों में बदलावा के राजधानी दिल्ली में आज से पेट्रोल 97.77 रुपये लीटर जबकि, डीजल 90.67 रुपये लीटर के भाव से बिक रहा है। इससे पहले पेट्रोल 94.77 रुपये लीटर और डीजल 87.67 रुपये लीटर बिक रहा था।

एशिया के अन्य देशों में 50% तक बढ़ा दाम
भारत ही नहीं दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान पर है। भारत को छोड़कर एशिया के अन्य देशों की बात करें तो यहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। मौजूदा समय में ईंधन खपत की जरूरत को पूरा करना कई देशों के साथ-साथ भारत के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। यहीं कारण हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देश की जनता से ईंधन को बचाने और सोची-समझी रणनीति के तहत खर्च करने की अपील कर रहे हैं। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार महंगे हो रहे पेट्रोल-डीजल के अलावा भारत के पास ईंधन के और क्या विकल्प हो सकते हैं। आइए, उन सभी संभवनाओं को विस्तार से समझते हैं।

जरुरतों का 85% तेल इंपोर्ट करता है भारत
इंटरनेशल मार्केट क्रूड ऑयल की आसमान छूती कीमतों और ऑयल क्राइसिस के बीच भारत के लिए अपनी एनर्जी सेक्योरिटी को बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत क्रूड ऑयल अन्य देशों से इंपोर्ट करता है, जो की देश की इकोनॉमी के लिए एक बड़ा बोझ के सामान हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच लगातार महंगे हो रहे पेट्रोल-डीजल के दवाब को कम करने के लिए भारत के पास कई मजबूत और व्यावहारिक विकल्प मौजूद हैं, जिन पर काफी तेजी से सरकार काम रही है।

1. एथेनॉल ब्लेंडिंग और फ्लेक्स-फ्यूल
भारत के अंदर पिछले कुछ समय में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाकर गाड़ियों को चलाना सबसे जल्दी और सफल विकल्प साबित हुआ है। भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जिससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है। सरकार अब देश में E85 (85% एथेनॉल) और शत-प्रतिशत एथेनॉल (E100) वाले ईंधन के नियम तय करने पर काम कर रही है।

इसके अलावा ब्राजील जैसे देशों की तर्ज पर भारत में ‘फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल्स’ (FFVs) को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो पूरी तरह से एथेनॉल या पेट्रोल-एथेनॉल के किसी भी मिश्रण पर चल सकती हैं। यह ईंधन गन्ने के रस, मक्का और कृषि अवशेषों (जैसे पराली) से बनता है, जिससे किसानों को भी फायदा होता है।

2. इलेक्ट्रिक व्हीकल्स का तेज विस्तार
पेट्रोल-डीजल के अलावा भारत के पास इलेक्ट्रिक व्हीकल के सबसे अच्छा विकल्प है। इलेक्ट्रीक स्कूटर और ई-रिक्शा के जरिए भारत में ईवी क्रांति बहुत तेजी से बढ़ी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट (जैसे इलेक्ट्रिक बसें) और कमर्शियल डिलीवरी फ्लीट भी तेजी से बैटरी की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।

3. सीएनजी और एलएनजी को नया रफ्तार
भारत अपनी अर्थव्यवस्था में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। देश में 25,400 किलोमीटर से ज्यादा लंबा गैस पाइपलाइन नेटवर्क तैयार हो चुका है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के बीच भारत सरकार ने युद्ध स्तर पर काम करते हुए सीएनडी और एलएनजी को नया रफ्तार दिया है। लंबी दूरी वाली वाहनों के लिए डीजल के विकल्प के रूप में लिक्विफाइड नेचुरल गैस को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो डीजल की तुलना में काफी सस्ती और कम प्रदूषण फैलाने वाली है।

4. ग्रीन हाइड्रोजन पर भी सरकार की जोर
हेवी कमर्शियल वाहनों जैसे कि बड़े ट्रक, ट्रेन और जहाज, जो कि इलेक्ट्रिक बैटरी से नहीं चलाई जा सकतीं, उनके लिए ग्रीन हाइड्रोजन सबसे बड़ा गेम-चेंजर साबित हुआ है। नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’के तहत सरकार ने कुल 17,500 करोड़ रुपये से अधिक का बजटीय प्रावधान किया है, जिसका लक्ष्य 2030 तक सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। देश की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां जैसे कि टाटा मोटर्स और अशोक लेलैंड हाइड्रोजन से चलने वाले कमर्शियल वाहनों के प्रोटोटाइप विकसित कर रही हैं।

5. बायो-डीजल और कंप्रेस्ड बायो-गैस
कृषि अपशिष्ट, पशुओं के गोबर और शहरों के गीले कचरे से ‘कंप्रेस्ड बायो-गैस’ (CBG) बनाई जा रही है, जो सीधे सीएनजी गाड़ियों और एलपीजी सिलेंडरों की जगह ले सकती है। इसके अलावा पारंपरिक डीजल में बायो-डीजल (जो गैर-खाद्य तेलों और वेस्ट कुकिंग ऑयल से बनता है) मिलाने के लक्ष्य को भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।

6. वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन
परिवहन क्षेत्र को सीधे राहत देने के अलावा, भारत अपनी डोमेस्टिक बिजली की जरूरतों के लिए कोयले और गैस पर निर्भरता कम कर रहा है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा अब गैर-फॉसिल (सोलर एनर्जी, विंड एनर्जी और हाइड्रोपावर) स्रोतों से आता है। इससे ग्रिड पर आधारित चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह ‘क्लीन और ग्रीन’ बनाने में मदद मिल रही है।

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