नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पांच देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा के पहले चरण में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के लिए रवाना हो गए हैं। अबू धाबी में पीएम मोदी यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस संक्षिप्त लेकिन बेहद अहम दौरे का मुख्य फोकस भारत की ऊर्जा सुरक्षा है। रूस से मिलने वाली तेल छूट खत्म होने के बीच, दोनों देशों के बीच एलपीजी आपूर्ति और पेट्रोलियम भंडारण को लेकर ऐतिहासिक समझौते होने की उम्मीद है। यूएई का ओपेक (OPEC) समूह से बाहर होने का फैसला भारत के साथ इस नई रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकता है।
यूएई के बाद प्रधानमंत्री 15 से 17 मई तक नीदरलैंड की यात्रा करेंगे, जहां निवेश और व्यापारिक रिश्तों को नया विस्तार दिया जाएगा। इसके उपरांत, 17 से 18 मई तक पीएम मोदी स्वीडन में रहेंगे, जहां वे प्रतिष्ठित ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ में हिस्सा लेंगे। यात्रा के चौथे पड़ाव के रूप में वे 18 से 19 मई तक नॉर्वे में होंगे। इन दौरों का उद्देश्य तकनीकी होड़ और भू-राजनीतिक तनाव के बीच नॉर्डिक देशों के साथ भारत के रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
प्रधानमंत्री की इस लंबी यात्रा का समापन 19 से 20 मई को इटली में होगा। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के विशेष निमंत्रण पर मोदी इटली पहुंचेंगे, जहां दोनों नेताओं के बीच निवेश, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा होगी। पांच देशों की यह समग्र यात्रा वैश्विक मंच पर भारत के प्रभाव को बढ़ाने, ऊर्जा की आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने और आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान के लिहाज से मील का पत्थर साबित होने वाली है। पूरा विश्व इस समय भारत के इन कूटनीतिक कदमों पर नजरें टिकाए हुए है।

