नई दिल्ली | महंगाई के मोर्चे पर आम जनता के लिए एक बार फिर बुरी खबर सामने आई है। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अप्रैल में तेजी से उछलकर 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले महीने मार्च में मात्र 3.88 प्रतिशत थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के कारण थोक महंगाई में यह भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अक्टूबर 2022 के बाद यह पहला मौका है जब थोक महंगाई ने आठ फीसदी के आंकड़े को पार किया है।
थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल है। आंकड़ों के मुताबिक, क्रूड पेट्रोलियम की थोक महंगाई दर में सालाना आधार पर 88.06 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि फ्यूल एंड पावर सेगमेंट में यह दर 24.71 प्रतिशत रही। इसके साथ ही एलपीजी की कीमतों में भी 10.92 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई-डिमांड के अंतर ने ईंधन की कीमतों को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर थोक बाजार पर पड़ा है।
ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में मची हाहाकार के बीच राहत की बात यह है कि खाद्य उत्पादों की महंगाई में नरमी बनी हुई है। अप्रैल में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 2.31 प्रतिशत रही, जो अन्य क्षेत्रों के मुकाबले काफी कम है। हालांकि, खुदरा महंगाई के आंकड़ों में मामूली बढ़त देखी गई है, जहां तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य महंगाई के चार्ट में शीर्ष पर रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक जोखिम कम नहीं हुए, तो आने वाले समय में विनिर्मित वस्तुओं और अन्य सेवाओं की लागत में और अधिक वृद्धि हो सकती है।

