मिडिल-ईस्ट संकट से भारत में महंगाई का चौतरफा हमला: दूध और सीएनजी के बाद अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल, आम जनता की जेब पर बढ़ा बोझ

नई दिल्ली | मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सामान्य पेट्रोल ₹97.77 और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर के स्तर पर पहुँच गया है। केवल तेल ही नहीं, बल्कि सीएनजी की कीमतों में भी ₹2 प्रति किलो की वृद्धि की गई है, जिससे परिवहन लागत बढ़ना तय है। पिछले 48 घंटों में दूध, सीएनजी और अब पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई इस ‘तिहरी मार’ ने आम आदमी का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

भारत में बढ़ती महंगाई का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में ईरान की नाकेबंदी के कारण 1,500 से अधिक जहाज फँसे हुए हैं, जिनमें कच्चा तेल और एलपीजी लदी हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के चलते भारतीय तेल कंपनियों को अब तक लगभग ₹75,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ऊर्जा संकट की गंभीरता को देखते हुए जनता से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है और स्वयं अपने काफिले के वाहनों में 50 प्रतिशत की कटौती कर सादगी का संदेश दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल-ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी, अनाज और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। अभी भी हॉर्मुज क्षेत्र में भारत के कई जरूरी मालवाहक जहाज फँसे हुए हैं, जिससे एलपीजी (रसोई गैस) की कीमतों में भी बढ़ोत्तरी की आशंका बनी हुई है। फिलहाल बाजार के रुख को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि आम जनता को इस महंगाई से जल्द राहत मिलेगी, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति अनिश्चित बनी हुई है।

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