वैश्विक संस्थाओं में सुधार “विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता”

नयी दिल्ली, 15 मई (वार्ता) भारत ने वैश्विक शासन संस्थाओं में तत्काल सुधारों की पुरजोर मांग करते हुए कहा है कि मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्था मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती। विदेश मंत्री डा एस जयशंकर ने शुक्रवार को यहां ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की दो दिन की बैठक के दूसरे और अंतिम दिन “वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार” विषय पर खुले सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ये सुधार “विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता” है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की जोरदार वकालत की और कहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व अब भी अपर्याप्त है। भारत ने सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर चरणबद्ध तरीके से वार्ता शुरू करने का भी आग्रह किया और अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया तथा ब्रिक्स जोहान्सबर्ग शिखर सम्मेलन में हुई प्रगति का उल्लेख किया।

आर्थिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की मांग की, जिसमें अधिक मजबूत और जवाबदेह बहुपक्षीय विकास बैंकों तथा विकास और जलवायु वित्त तक आसान पहुंच पर जोर दिया गया। भारत ने वैश्विक व्यापार प्रणाली में सुधार का भी समर्थन किया और गैर-बाजार प्रथाओं तथा आपूर्ति श्रृंखला के केंद्रीकरण पर चिंता जताते हुए विश्व व्यापार संगठन में नियम-आधारित व्यवस्था को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि सुधार प्रक्रिया के अंतर्गत बहुपक्षवाद लोकतांत्रिक, समावेशी और संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहयोग, संवाद और सुधार अधिक न्यायसंगत और प्रतिनिधिक वैश्विक व्यवस्था के निर्माण के लिए आवश्यक है।

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