मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की अस्मिता बचाने उठने लगी आवाजें

जबलपुर। मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री के नाम जबलपुर जिला प्रशासन के अधिकारी को शहर के तमाम संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा एक ज्ञापन सौंपा गया और मांग की गई कि मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर उसे तत्काल खारिज करें। विरोध करने वालों ने स्पष्ट कहा कि शासन के इस निर्णय से सीधा असर जबलपुर के प्रशासनिक तथा शैक्षणिक रसूख पर पड़ेगा,इससे जबलपुर का कद घटेगा तथा जबलपुर की अस्मिता को चोट भी पहुंचेगी।

डॉ. पीजी नाजपांडे ने बताया कि जबलपुर की मप्र मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के विखंडन से नये कैंपस खुलने से जबलपुर का ‘सेन्ट्रल हब वाला दर्जा प्रभावित होगा, इस यूनिवर्सिटी की परि सम्पत्तियां और देनदारियों के बंटवारे से उसके संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा अन्य शहरों में शिफ्ट हो जायेगा और नये क्षेत्रीय हिस्से बनने से जबलपुर के अधीन आने वाले कॉलेजों की संख्या घट जायेगी तथा जबलपुर क्षेत्राधिकार में कमी आयेगी। विदित हो कि पूर्व में भी जबलपुर के कई संस्थानों का विखंडन किया जा चुका है जिसमें विद्युत मंडल, हाईकोर्ट, रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी, जबलपुर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जबलपुर वेटेरनरी यूनिवर्सिटी शामिल हैं।

पीएम को लिखा पत्र

मेडिकल साईंस विश्वविद्यालय का विखण्डन जबलपुर की अस्मिता से खिलवाड़ को लेकर महाकौशल जनप्रतिनिधि विचार मंच विरोध जताया है। इस मौके पर मंच के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, संभागायुक्त जबलपुर, कलेक्टर जबलपुर को पत्र भी लिखा है। और मांग की है कि इस विखण्डन को रोका जाए।

महाकौशल जनप्रतिनिधि विचार मंच के संयोजक एवं प्रदेश अध्यक्ष विजय कांडा ने बताया कि जबलपुर मेडिकल साईंस विश्वविद्यालय पूरे संभाग में स्वास्थ के क्षेत्र में अग्रणी संस्था है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा अपनी नई योजना को लेकर जबलपुर मेडिकल साईंस विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटने की पूरी तैयारी कर ली गई है, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा लिए गए निर्णय का सीधा असर जबलपुर के साख और सम्मान पर पड़ेगा। महाकौशल जनप्रतिनिधि विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष विजय कांडा की अध्यक्षता में गोरखपुर स्थित मुख्यालय में बैठक आयोजित की गई, जिसमें जबलपुर मेडिकल साईंस विश्वविद्यालय के विखंडन का विरोध किया गया एवं मध्यप्रदेश सरकार की तीखी आलोचना की गई।

बैठक में मुख्य रूप से महाकौशल जनप्रतिनिधि विचार मंच के प्रदेशाध्यक्ष विजय कांडा, राजेन्द्र चैधरी, रूपलाल यादव, ठाकुर दीपक सिंह राजपूत, पिंकी ठाकुर, सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

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