
इंदौर. शहर में नगर निगम नारियल पानी पीने के बाद उससे निकलने वाले कचरे यानि वेस्ट से अब तरह-तरह के घरेलू उत्पाद तैयार करेगा. इसके लिए नगर निगम द्वारा 60 टन क्षमता का प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है.
देश के स्वच्छ शहर में नगर निगम द्वारा तरह-तरह के कचरे से उपयोगी बैग, पेवर ब्लॉक, फर्नीचर और जैविक खाद बनाई जा रही है. नगर निगम अब कच्चे नारियल के कचरे से भी तरह-तरह के उत्पाद बनाने की तैयारी कर रहा है. इंदौर नगर निगम ने नारियल कचरे के निपटान के लिए एक विशेष तरह का प्लांट लगाने का निर्णय लिया है. उक्त प्लांट में गीले और सूखे दोनों ही तरह के नारियल के अवशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा. फिलहाल इंदौर में नारियल पानी पीने के बाद बच्चे हुए वेस्ट से तरह-तरह के फर्नीचर और प्लास्टिक मटेरियल तैयार करने के लिए ग्रेन्यूल समेत कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं. इसके अलावा मकान के मलवे से पेवर ब्लॉक तैयार हो रहे हैं. वहीं लकड़ी से भी नगर निगम के देवगुराडिया प्लांट पर तरह-तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं.
पीपीपी मोड पर लगाएंगे प्लांट
नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने बताया कि अपनी तरह का यह विशेष प्लांट शहर के देवगुराडिया इलाके में पीपीपी मोड पर लगाया जाएगा. प्लांट की क्षमता 60 टन प्रतिदिन कचरे का निस्तारण करने की होगी. निगम कमिश्नर सिंघल ने कहा कि पीपीपी मॉडल पर प्लांट के लिए टेंडर जारी किए गए हैं. जो भी एजेंसी इसके लिए आगे आएगी, उसे रॉयल्टी आधार पर प्लांट स्थापित करने में नगर निगम मदद करेगा.
क्या-क्या बनता है नारियल के छिलके से
नारियल के छिलके, जटा और खोल से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनमें कोकोपीट (नमी सोखने वाली खाद) नारियल की रस्सी, डोर मेट, ब्रश, हस्तशिल्प के कटोरा, चम्मच, मध्यम घनत्व वाले फाइबर बोर्ड, इको फ्रेंडली बर्तन मांजने का जूना तैयार किया जाता है. वहीं हस्त शिल्प वस्तुओं को बनाने में भी नारियल का कई प्रकार से उपयोग होता है.
