गोयल की अपील: निर्यात बढ़ाने, आयात कम करने के लिए काम करें उद्योग

नयी दिल्ली, 12 मई (वार्ता) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बदलते वैश्विक परिदृश्य के मद्देनजर मंगलवार को उद्योग जगत से निर्यात बढ़ाने और आयात कम करने की अपील की।

श्री गोयल ने यहां भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार आत्मनिर्भरता बढ़ाने और देश की क्षमताओं पर विश्वास की नीति पर लगातार काम कर रही है।

सरकार और उद्योग जगत के मिलकर काम करने की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने उद्योगों से विभिन्न क्षेत्रों में अधिक दक्षता लाने, बर्बादी कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और आयात बिल को कम करने पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार ने मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सार्वजनिक परिवहन अवसंरचना में निवेश किया है। ऊर्जा की बचत के उपायों से हर साल लगभग 10 अरब डॉलर की ऊर्जा लागत कम हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है और दुनिया का भारत पर विश्वास बढ़ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। उन्होंने उद्योग जगत से अगले पांच-छह साल में दो लाख करोड़ डॉलर का निर्यात लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया और कहा कि लगभग 15 प्रतिशत वार्षिक निर्यात वृद्धि के साथ यह संभव है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, स्टील और स्टार्टअप जैसे क्षेत्र नवाचार और प्रतिस्पर्धा के माध्यम से निर्यात को गति दे सकते हैं।

श्री गोयल ने बताया कि इस साल लगभग 863 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात होने की संभावना है। उन्होंने उद्योग जगत से सरकार द्वारा विभिन्न मुक्त व्यापार संधियों (एफटीए) का लाभ उठाने की अपील की और कहा कि पिछले साढ़े तीन साल में 38 देशों के साथ किए गए नौ एफटीए विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हैं। ये भारत में निवेश आकर्षित करने तथा निर्यात बढ़ाने में मदद करेंगे। ये देश भारत के प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि पूरक हैं और बड़े वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं।

स्विटजरलैंड, अमेरिका और यूरोपीय संघ के बारे में उन्होंने कहा कि वहां प्रति व्यक्ति आय भारत से कहीं अधिक है और वे भारत की तुलना में कम लागत पर उत्पादन नहीं कर सकते। जहां इन देशों के पास मजबूत तकनीकी और औद्योगिक क्षमताएं हैं, वहीं भारत के पास प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षमता और प्रतिभा है।

श्री गोयल ने बताया कि एफटीए का उद्देश्य देश की निर्यात क्षमता को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना और भारतीय व्यवसायों के लिए वैश्विक बाजारों में नये अवसर पैदा करना है। उन्होंने उद्योग जगत से इन समझौतों का लाभ उठाकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का आग्रह किया।

उद्योग जगत से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग को अपनाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि एआई को केवल लागत घटाने के साधन के रूप में नहीं बल्कि व्यवसाय विस्तार, दक्षता और बाजार वृद्धि के उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिये। उद्योगों को कर्मचारियों के लिए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना चाहिए और इसका उपयोग के उत्पादकता बढ़ाने, बड़े बाजार हासिल करने और व्यापार विस्तार के लिए करना चाहिये, न कि केवल कर्मचारियों की संख्या घटाने के लिए।

 

 

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