
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मंगलवार को छतरपुर जिले के ढोढन बांध निर्माण स्थल पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित विस्थापित आदिवासी एवं किसान परिवारों के आंदोलन स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार पर प्रभावित परिवारों के अधिकारों की अनदेखी करने और लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का आरोप लगाया।
भारी पुलिस बंदोबस्त और प्रशासनिक रोक-टोक के बावजूद पटवारी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ आंदोलनरत परिवारों तक पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। बताया गया कि प्रशासन ने वन क्षेत्र में प्रवेश रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। वन विभाग के अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि उनके दौरे से क्षेत्र के वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं।
प्रशासन के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए पटवारी ने कहा कि जहां एक ओर परियोजना स्थल पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य, भारी मशीनों का संचालन और सैकड़ों मजदूर लगातार काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी नेताओं को पीड़ित आदिवासी परिवारों से मिलने से रोकना पूरी तरह अलोकतांत्रिक और तानाशाहीपूर्ण कदम है।
उन्होंने आंदोलन को केवल जमीन का मुद्दा न बताते हुए “जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और सम्मान” की लड़ाई करार दिया। पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों को न्याय, उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास दिलाने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि संविधान और प्राकृतिक न्याय की भावना के अनुसार जिन परिवारों की जमीन और जंगल छीने जा रहे हैं, उन्हें जमीन के बदले जमीन और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना चाहिए। केवल आर्थिक मुआवजा देकर आदिवासी समुदायों का भविष्य सुरक्षित नहीं किया जा सकता।
पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के निर्देश पर उनकी यात्रा रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। उन्होंने प्रशासन के उस तर्क की भी आलोचना की जिसमें कहा गया था कि उनके दौरे से “बाघ, तेंदुए और हाथी” प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आदिवासियों, किसानों और विस्थापित परिवारों के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित कांग्रेस अन्याय के खिलाफ संघर्ष से पीछे हटने वाली नहीं है, चाहे मुकदमों या जेल की धमकियां क्यों न दी जाएं।
