तेहरान, 12 मई (वार्ता) ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब केवल एक संकीर्ण समुद्री मार्ग नहीं रह गया है, बल्कि इसे एक “व्यापक रणनीतिक और परिचालन समुद्री क्षेत्र” के रूप में देखा जा रहा है। आईआरजीसी नौसेना के राजनीतिक उप प्रमुख मोहम्मद अकबरजादेह ने मंगलवार को तस्नीम समाचार एजेंसी से बातचीत में कहा कि हालिया संघर्षों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य की अवधारणा में बड़ा बदलाव आया है और अब यह पारंपरिक सीमाओं से कहीं अधिक विस्तृत परिचालन क्षेत्र को समाहित करता है। उन्होंने कहा कि पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को होर्मुज द्वीप जैसे सीमित क्षेत्रों के आसपास एक संकीर्ण समुद्री गलियारे के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसे जास्क तट से लेकर सिर्री द्वीप तक फैले विस्तृत समुद्री क्षेत्र के रूप में माना जा रहा है।
श्री अकबरजादेह के अनुसार जो समुद्री गलियारा पहले लगभग 32 से 48 किलोमीटर चौड़ा माना जाता था, वह अब प्रभावी रूप से 320 से 480 किलोमीटर तक विस्तृत क्षेत्र में बदल गया है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र किश्म द्वीप और ग्रेटर तुंब से आगे तक फैला हुआ है और अब “पूर्ण चाप” का स्वरूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि यह विस्तारित क्षेत्र अब केवल एक समुद्री व्यापार मार्ग नहीं, बल्कि व्यापक रणनीतिक समुद्री क्षेत्र के रूप में कार्य कर रहा है। श्री अकबरजादेह ने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं तथा किसी भी “उकसावे वाली कार्रवाई” का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “ईरान क्षेत्रीय गतिविधियों की सटीकता और अधिकार के साथ निगरानी करता है और अपने जलक्षेत्र तथा हितों के किसी भी उल्लंघन की अनुमति नहीं देगा।” आईआरजीसी अधिकारी ने कहा कि ईरान ने वैश्विक तेल व्यापार के प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रति व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाया है और देश की नौसैनिक सेनाएं क्षेत्र में सक्रिय बनी हुई हैं।

