इंदौर: आज शहर में यातायात जाम आम समस्या बन चुका है. अब स्थिति यह हो गई है कि शहर की कोई सड़क और इलाका ऐसा नहीं है, जहां यातायात जाम नहीं हो. खासकर सुबह 10 से 12 बजे तक और शाम 5 से रात 9 बजे तक शहर में वाहन चलाना दुभर हो गया है. यातायात की बदतर स्थिति तब देखने लायक होती है, जब शहर की छोटी-छोटी गलियों में वाहन फंसे नजर आते है. उक्त स्थिति से सवाल खड़ा होता है कि आखिर शहर का यातायात सुधरेगा कौन?
इंदौर शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बेकाबू हो चुकी है. वाहन चालक अनावश्यक पेट्रोल जलाने और प्रदूषण से त्रस्त होते है. स्थिति दिन ब दिन बिगड़ रही है और जिम्मेदार अपनी कमियां एक दूसरे पर डोल कर इति श्री कर लेते है. यातायात की दृष्टि से शहर एक प्रयोगशाला बन चुका है, जिसकी मर्जी होती है वैसा प्रयोग शुरू का लागू कर देता है. सबसे बड़ी कमी सभी सरकारी विभागों के बीच आपसी सामंजस्य की कमी है.
पुलिस, नगर निगम, आईडीए, एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी, मेट्रो अधिकारियों के बीच बिलकुल समन्वय नहीं दिखता है. सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में कलेक्टर के सामने सभी अधिकारी हा हू करके बचते है, लेकिन समाधान नहीं निकलते है. शहर के यातायात पर देखा जा सकता है कि अधिकारी समाधान कर रहे है या फिर समस्या पैदा कर रहे हैं. वर्तमान में सड़क के ट्रैफिक व्यवथा की स्थिति यह है कि एक ब्लैक स्पॉट खत्म नहीं होता और यातायात जाम के चार नए ब्लैक स्पॉट बन जाते है. ब्लैक स्पॉट नहीं बनते हैं तो नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, आईडीए, एमपीआरडीसी और मेट्रो की सड़कों पर खुदाई यातायात जाम का कारण बन जाती है.
बीआरटीएस से ज्यादा जगह कवर की
अभी शहर में ताजा मामला एबी रोड का है, जिस पर बड़ी मुश्किल से यातायात व्यवस्था थोड़ी ठीक हुई थी कि पीडब्ल्यूडी ने एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए पतरे ठोक दिए है. बीआरटीएस सड़क में सिटी बस के लेन से ज्यादा सड़क पीडब्ल्यूडी ने कवर कर ली. इससे एक माह बाद ही यातायात जाम की स्थिति पूर्ववत हो गई. इसका नतीजा यह निकला कि एबी रोड पर कई स्थानों पर लेफ्ट टर्न चौड़े होने के बाद भी रोज जाम लगना आम हो चुका है.
इन स्थानों पर होता है जाम
ऐसे शहर के चंदन नगर, संजय सेतु, नंदलालपुरा चौराहा, सपना संगीता, नवलखा चौराहा, छावनी, जिंसी, रामबाग, मरिमाता, कालानी नगर, बंगाली , महूनाका, रणजीत हनुमान, नरेंद्र तिवारी मार्ग, बैंक कॉलोनी , प्रिकांको कॉलोनी, सब्जी मंडी चौराहा, चोइथराम चौराहा, राजीव गांधी, राजेंद्र नगर एबी रोड, अग्रसेन चौक, बस स्टैंड, गंगवाल और राजमोहल्ल पर यातायात जाम आम बात हो चुकी है.
क्या किसी के पास योजना नहीं?
अब शहर में यातायात की बेकाबू और बिगड़ती स्थिति को सुधरेगा कौन? यह सवाल रोज के यातायात जाम होने से उठ रहा है। क्या किसी के पास निर्बाध यातायात चलाने की योजना नहीं है? योजना को राजनीतिक हित से उपर शहर हित में लागू करने के इच्छा शक्ति की अधिकारी या जनप्रतिनिधि में बची नहीं है, जो आम जनता को कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण से बचा सके या कम कर सके?
