इंदौर: साल 2026 में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है. इंदौर जैसे शहरों में भी हालात चिंताजनक हैं. साल 2025 की तुलना में 2026 में रसोई का बजट और बिगड़ गया है, जहां आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि देखी जा रही है. सब्जी, दूध और अन्य रसद के दाम बढ़े हैं. बच्चों की स्कूल फीस, शिक्षा, कपड़े और बिजली बिल में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग का बजट बिगड़ गया है. वहीं, ईरान-अमेरिका तनाव के कारण पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में भी भारी उछाल की आशंका है.
दूसरी ओर, महंगाई के मुकाबले वेतन, मजदूरी और छोटे व्यापारियों की आय में वृद्धि नहीं हो रही है, जिससे वास्तविक आय घट रही है. गृहिणियों के लिए किचन का बोझ संभालना मुश्किल हो गया है, क्योंकि तेल, दूध और गैस की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. पेट्रोकेमिकल की कमी और गैस की उच्च कीमतों के कारण इंदौर के उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है, जिससे कांच और अन्य वस्तुएं भी महंगी होती जा रही हैं.
महंगाई के कारण लोगों की बचत घट रही है. निम्न और मध्यम वर्ग पर महंगाई का सबसे अधिक असर पड़ रहा है. यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो जीवनस्तर में और गिरावट आ सकती है. हालांकि, सरकार की ओर से महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण है. सरकार को चाहिए कि करों में राहत दे, आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर सख्त निगरानी रखे, स्कूल फीस पर नियंत्रण करे और आमदनी बढ़ाने के लिए रोजगार व छोटे कारोबार को मजबूत करे. महंगाई पर नियंत्रण ही आम आदमी को वास्तविक राहत दे सकता है.
यह बोले आम नागरिक…
दुकान की आमदनी का बड़ा हिस्सा बिजली बिल, बच्चों की फीस और घर के राशन में ही निकल जाता है. बचत तो लगभग खत्म हो गई है. इस बढ़ती महंगाई ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी है.
– सुभाष पारीक, किराना व्यापारी
पहले महीने भर का राशन पांच से सात हजार रुपये में आता था. आज दस-बारह हजार रुपये खर्च हो जाते हैं. वेतन उतना ही है, बढ़ा नहीं. लेकिन, घर का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है. परिवार का बजट संभालना बहुत मुश्किल हो गया है.
– सूरज माली, आम नागरिक
मजदूरी-दिहाड़ी से जितना कमाते हैं, उससे घर का खर्च पूरा नहीं पड़ता. गैस सिलेंडर, सब्जी और राशन के दाम इतने बढ़ गए हैं कि परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. सरकार को महंगाई पर नियंत्रण करना चाहिए.
– कैलाश हिवराड़े, आम उपभोक्ता
