नई दिल्ली | कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन लागत में भारी बढ़ोतरी के कारण अब रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं (FMCG) के दाम बढ़ने तय हैं। डाबर, ब्रिटानिया और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी प्रमुख कंपनियां अपने मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से कीमतों में वृद्धि की योजना बना रही हैं। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए अवरोधों ने कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स को महंगा कर दिया है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने भी विनिर्माण लागत को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट और शीतल पेय जैसे उत्पादों की कीमतें 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि कंपनी करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है, जिसकी भरपाई के लिए कीमतों में पहले ही औसतन 4 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। वहीं, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी गुड डे, मेरी गोल्ड और टाइगर जैसे लोकप्रिय ब्रांडों के बड़े पैक की कीमतों में बढ़ोतरी और वजन में कटौती (Grammage reduction) के विकल्प पर विचार शुरू कर दिया है। एचयूएल ने भी स्पष्ट किया है कि यदि जिंसों की कीमतों में नरमी नहीं आई, तो वे आगे और मूल्य वृद्धि करने से पीछे नहीं हटेंगे।
कीमतों में बढ़ोत्तरी के बावजूद, कंपनियां ग्रामीण और कम आय वाले बाजारों को ध्यान में रखते हुए 5, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक की कीमतों को स्थिर रखने का प्रयास कर रही हैं। बिक्री पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को कम करने के लिए कंपनियां विज्ञापनों और प्रचार खर्चों में कटौती कर रही हैं और अपने भंडार प्रबंधन को अधिक कुशल बनाने में जुटी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि परिचालन लागत में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होने के कारण, आम उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ना लगभग अनिवार्य है। आने वाले महीनों में किचन बजट और व्यक्तिगत देखभाल के सामान पर होने वाला खर्च बजट को बिगाड़ सकता है।

