सतना :प्रधानमंत्री के कार्यक्रम मन की बात में हुए उल्लेख के जरिए सुर्खियों में आए और जैव विविधता बोर्ड पुरुस्कार प्राप्त कर चुके जिले के ख्यातिलब्ध किसान राम लोटन कुशवाहा ने न सिर्फ अपने जीवित रहते हुए ही अपना मृत्यु संस्कार कर लिया है, बल्कि मुत्यु भोज के आयोजन को लेकर गांव-क्षेत्र, मित्र-मण्डली व रिश्तेदारों के बीच निमंत्रण पत्र भी बांट रहे हैं.दरअसल उन्होंने अपना शरीर पहले ही मेडिकल कॉलेज को दान कर दिया है. वहीं अब स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आता देख वे जीवित रहते ही स्वयं का अंतिम संस्कार करने को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं.
जिले की उचेहरा तहसील क्षेत्र अंतर्गत अतरवेदिया गांव के निवासी राम लोटन कुशवाहा अपने कुछ सगे संबंधित व रिश्तेदारों के साथ शनिवार को प्रयागराज गए थे. जहां पर संगम क्षेत्र के निकट गंगा किनारे उन्होंने अपने मृत्यु संस्कार से संबंधित सभी विधियों को पूरा किया. इसी कड़ी में प्रयागराज में ही उन्होंने अपना पिण्डदान भी कर दिया. जीवित रहते हुए अपना पिण्डदान करने कर वापस गांव लौटने के बाद भी वे रुके नहीं. बल्कि अपने सभी सगे-संबंधी और मित्र-मण्डली सहित गांव-क्षेत्र के लोगों को अपनी तेरहवीं के भोज का निमंत्रण पत्र भी बांटना शुरु कर दिया.
निमंत्रण पत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख भी है कि अपने शरीर को मेडिकल में दान करने के कारण राम लोटन अपनी तेरही और वर्षी का कार्यक्रम अपने जीते जी कर रहे हैं. उनकी तेरहवीं और वर्षी के अवसर पर 13 मई को भोज भी रखा गया है. वहीं निमंत्रण पत्र में उनकी पत्नी, बेटा-बेटी और पुत्र वधू के नाम भी सम्मिलित हैं. लिहाजा राम लोटन की जा रही इस पहल की जानकारी सामने आते ही कुछ लोगों के बीच जहां सनाका खिंचा हुआ है. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि आखिरकार राम लोटन को ऐसा करने की आवश्यकता क्यों पड़ी.
परिहास से आहत हुआ मन
इस घटना की जानकारी सामने आने पर जब पोस्ट पिथौराबाद के अतरवेदिया गांव के निवासियों से चर्चा की गई तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि इस समूचे घटनाक्रम के पीछे राम लोटन के मन की पीड़ा है. दरअसल राम लोटन द्वारा अपना शरीर मेडिकल को दान कर दिए जाने की घोषणा के बाद से ही लोगों द्वारा यह कहकर उनका परिहास उड़ाया जा रहा था कि अब न तो उनके शरीर का अंतिम संस्कार होगा और न ही तेरहवीं का भोज आयोजित किया जाएगा. इस परिहास से आहत होकर राम लोटन ने जीवित रहते हुए ही अपना अंतिम संस्कार और तेरहवीं भोज का आयोजन करने की ठान ली. वहीं निमंत्रण पत्र बांटने के साथ ही श्री कुशवाहा लोगों को यह जवाब देना भी नहीं भूलते ही मृत्यु के बाद शरीर जलकर नष्ट हो जाए, इससे बेहतर है के वह मेडिकल छात्रों के काम आए. रही बात मृत्यु भोज की तो वे लोगों को निराश न करते हुए अपने जीते जी ही कर दे रहे हैं.
दुर्लभ औषधीय पौधों की खेती
अतरवेदिया निवासी राम लोटन कुशवाहा 5 वर्ष पहले उस वक्त अचानक सुर्खियों में आए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में उनका उल्लेख किया गया. प्रधानमंत्री द्वारा 1 मिनट10 सेकेंड तक श्री कुशवाहा की दुर्लभ औषधियों की बगिया की प्रसंशा की गई थी. दरअसल श्री कुशवाहा ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ जमीन में दुर्लभ मानी जाने वाली 150 से अधिक औषधीय पौधे उगाए जाते हैं. जिसमें दहिमन, मेदा, कुम्हीसादन, बीजा ओदार, भेड़ार, मैनहर खूजा, बोधी, कसही, बरौता राजमकोर, काली-सफेद मूसली आदि शामिल हैं.
क्षेत्र में कहा भी जाता है कि जो कहीं न मिले वह राम लोटन की बगिया में मिले. पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के निर्देशन में औषधीय पौधों के संरक्षण के क्षेत्र में कार्य किए जाने के कारण राम लोटन को 2 वर्ष पहले मप्र राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया था. गौरतलब है कि किडनी संबंधी समस्यायों के चलते इन दिनों श्री कुशवाहा का स्वास्थ्य कुछ नरम-गरम बना हुआ है.
