
बीना। तहसील के ग्राम जोध में लंबे समय से चले आ रहे विवाद का आखिरकार न्यायालय में शांतिपूर्ण समाधान हो गया। पुराने मनमुटाव और रास्ते में पत्थर की पटियां रखने को लेकर शुरू हुआ विवाद गाली-गलौज और मारपीट तक पहुंच गया था, जिसका मामला न्यायालय में विचाराधीन था।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश शरद जोशी ने दोनों पक्षों को आपसी भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और कानून की गरिमा का महत्व समझाते हुए शांतिपूर्ण तरीके से समझाइश दी। उनकी संवेदनशील पहल का दोनों पक्षों पर सकारात्मक असर पड़ा और वर्षों से चली आ रही कटुता समाप्त हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों ने न्यायालय में स्वेच्छा से राजीनामा प्रस्तुत कर भविष्य में सौहार्दपूर्वक रहने का संकल्प लिया।
न्यायालय कक्ष में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के प्रति मनमुटाव भुलाकर मेल-मिलाप का रास्ता अपनाया। उपस्थित अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और ग्रामीणों ने इस पहल को संवेदनशील न्याय और सामाजिक समरसता की मिसाल बताया।
जानकारी के अनुसार न्यायाधीश शरद जोशी के न्यायालय में अब तक लगभग 63 लंबित मामलों का सफल निराकरण किया जा चुका है। वहीं बैंक और नगर पालिका से जुड़े करीब 194 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का भी आपसी समझौते के माध्यम से समाधान कराया गया है, जिनमें कुल 2 करोड़ 7 लाख 68 हजार 462 रुपए का अवार्ड पारित किया गया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करती है, बल्कि समाज में संवाद, विश्वास और सौहार्द को भी मजबूत बनाती है। ग्रामीणों ने इसे केवल एक समझौता नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने वाला ऐतिहासिक क्षण बताया।
