नयी दिल्ली, 08 मई (वार्ता) घरेलू मांग कमजोर रहने से भारतीय निर्माण उपकरणों की बिक्री में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी। इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईसीईएमए) ने शुक्रवार को बताया कि गत 31 मार्च को समाप्त वित्त में निर्यात समेत कुल बिक्री 1,40,191 इकाई से घटकर 1,36,995 इकाई रह गयी। इसका मुख्य कारण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार और देरी रही। घरेलू चुनौतियों के बावजूद निर्यात में 32 प्रतिशत का मजबूत उछाल दर्ज किया गया जिससे उद्योग पर कम असर हुआ।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्माण उपकरण बाजार है। वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर की अनुमानित वैल्यू 10 अरब डॉलर थी जिसके साल 2030 तक 8.3 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि के साथ 14.76 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
आईसीईएमए के अध्यक्ष और जेसीबी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक दीपक शेट्टी ने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 में जो मामूली गिरावट देखी गयी है, उसे उद्योग की किसी बुनियादी कमजोरी की बजाय जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन की धीमी रफ्तार के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिये।” उन्होंने कहा कि सरकारी पूंजीगत आवंटन ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, लेकिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों और पूंजी जारी होने में देरी ने पूरे साल उपकरणों की मांग पर असर डाला। श्री शेट्टी ने कहा कि निर्यात में 32 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी के साथ उद्योग ने अपनी मजबूती साबित की। यह देश में बने निर्माण उपकरणों की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है। आईसीईएमए की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय निर्माण उपकरण उद्योग सड़क, रेलवे, खनन, शहरी अवसंरचना, आवास और ग्रामीण विकास में जारी निवेश की बदौलत दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं को लेकर आशावादी बनी हुई है। उम्मीद है कि जैसे-जैसे परियोजना क्रियान्वयन में सुधार होगा और बुनियादी ढांचा गतिविधि में तेजी आयेगी, मांग में भी गति पकड़ेगी।

