तमिलनाडु की राजनीति में 50 साल पुरानी दुश्मनी खत्म होने के संकेत: विजय की पार्टी को रोकने के लिए डीएमके और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन की अटकलें तेज

चेन्नई | तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिझागा वेत्री कझगम’ (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जिससे पांच दशकों से राज कर रही डीएमके और एआईएडीएमके के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। सूत्रों के अनुसार, अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए ये दोनों धुर विरोधी दल हाथ मिला सकते हैं। डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन को विधायकों ने आपातकालीन फैसले लेने के लिए अधिकृत किया है, वहीं एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी पलानीस्वामी ने भी पार्टी हित में कड़े फैसले लेने के संकेत दिए हैं।

सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है, जबकि विजय की पार्टी के पास 108 सीटें हैं। यदि डीएमके (59 सीटें) और एआईएडीएमके (47 सीटें) साथ आती हैं, तो उनके पास कुल 106 सीटें होंगी। अन्य छोटे दलों के समर्थन के साथ यह आंकड़ा बहुमत के करीब पहुंच सकता है। हालांकि, इस संभावित गठबंधन से वीसीके और कम्युनिस्ट पार्टियों के छिटकने का डर है। वर्तमान में टीवीके नेता विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया है और वे कांग्रेस के साथ मिलकर गठबंधन सरकार बनाने की कोशिशों में जुटे हैं।

आज का दिन तमिलनाडु के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वीसीके और कम्युनिस्ट पार्टियां अपनी उच्च स्तरीय बैठकों के बाद अंतिम निर्णय की घोषणा करेंगी। यदि ये दल टीवीके को समर्थन देते हैं, तो विजय का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो जाएगा। दूसरी ओर, यदि डीएमके और एआईएडीएमके का ऐतिहासिक गठबंधन हकीकत बनता है, तो यह भारतीय राजनीति का सबसे चौंकाने वाला मोड़ होगा। फिलहाल, पूरे राज्य की नजरें राजभवन और राजनीतिक दलों के मुख्यालयों पर टिकी हैं, जहां पल-पल समीकरण बदल रहे हैं।

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