
जबलपुर। दमोह के कुलुआ मारूताल गांव को चौबीस घंटे में खाली करने के प्रशासनिक आदेश को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए अपने अंतरिम आदेश से गांव खाली करने के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही न्यायालय ने दमोह कलेक्टर सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह जनहित याचिका दमोह जिले की दमयंती नगर तहसील अंतर्गत ग्राम कुलुआ मारूताल के सरपंच नारायण राय की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि हालही में कलेक्टर व तहसीलदार ने उक्त गांव को चौबीस घंटे में खाली करने का नोटिस जारी कर दिया, जिसके पीछे का कारण उक्त जमीन हाउसिंग बोर्ड को सौंपना बताया गया है। आवेदक का कहना है कि उक्त गांव में वह दशकों से रह रहे है, इस तरह अचानक से उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता। यदि गांव खाली कराया जाता है तो पहले उनका पुनर्वास किया जाये। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हंसराज भारती ने पक्ष रखा। जिन्होंने दलील दी कि बिना विस्थापन किये अपनाई जा रहीं उक्त कार्रवाई पूर्णत: अनुचित है। मामले में सचिव राजस्व विभाग, दमोह कलेक्टर व दमयंती नगर तहसीलदार को पक्षकार बनाया गया है। मामले की सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अंतरिम आदेश से बेदखली पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
