नरसिंहगढ़: नगर के प्राचीन वार्ड क्रमांक 1 स्थित ऐतिहासिक नरसिंहगेट समीप रियासतकालीन खेड़ापति गणेश मंदिर में सोमवार को एक अनूठी घटना देखने को मिली. भगवान खेड़ापति गणेश का चोला चढ़ाने के दौरान अचानक वर्षों पुराना सिंदूरी चोला उतर गया. जिससे करीब सौ साल बाद भगवान श्री गणेश की प्रतिमा का वास्तविक और दुर्लभस्वरूप सामने आ गया.
प्रतिमा पर वर्षों से लगातार सिंदूर चढ़ने के कारण मूल आकृति स्पष्ट दिखाई नहीं देती थी. लेकिन चोला हटते ही भगवान गणेश चार भुजाओं वाले स्वरूप में विराजमान दिखाई दिए. घटना की जानकारी मिलते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़
उमड़ पड़ी और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल बन गया. मंदिर समिति द्वारा विशेष अभिषेक, हवन-पूजन एवं महाआरती का आयोजन किया गया. बाद में उतरे हुए चोले का विसर्जन नर्मदापुरम में किया गया.
हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश का चारभुजा स्वरूप विशेष महत्व रखता है. उनकी चार भुजाएं शक्ति, ज्ञान, अनुशासन और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं. एक हाथ में अंकुश नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण का संदेश देता है. दूसरा पाश संयम और अनुशासन का प्रतीक है, तीसरे हाथ का मोदक आनंद और ज्ञान का संकेत देता है. जबकि चौथा हाथ भक्तों को आशीर्वाद और अभय प्रदान करता है. श्रद्धालु इस दुर्लभ दर्शन को आस्था और चमत्कार से जोड़कर देख रहे हैं.
