इंदौर: प्रदेश में करीब-करीब सारे निगम और मंडल अध्यक्ष बन गए है. इंदौर का फैसला नहीं हो पा रहा है. उससे बढ़कर यह है कि इंदौर के किसी भी नेता को प्रदेश में कोई पद नहीं सौंपा गया है. आईडीए अध्यक्ष पद को लेकर बड़े नेताओं में जमकर रस्साकशी चल रही है. एक चर्चा यह भी है कि इंदौर को लेकर मामला पेंडिंग ही कर दिया गया है.
प्रदेश के अधिकांश निगम और मंडल अध्यक्ष पद पर भाजपा ने राजनीतिक नियुक्तियां और बोर्ड बना दिए है. इंदौर से किसी नेता को प्रदेश में कोई निगम मंडल में तरजीह नहीं दी गई. सत्ता और संगठन ने अन्य जिलों के नेताओं को उपकृत करके प्रदेश में नियुक्तियां कर दी है. इंदौर आईडीए अध्यक्ष पद पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल फैसला नहीं कर पा रहे हैं. आईडीए अध्यक्ष पद की दौड़ में इतनी खींचतान मची हुई है कि सिर्फ दो नेता के नाम रह गए है. कैलाश विजयवर्गीय समर्थक हरिनारायण यादव और शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र सिंह तोमर समर्थक सुदर्शन गुप्ता के बीच आईडीए अध्यक्ष की लड़ाई रह रह गई है.
मुख्यमंत्री का रूख स्पष्ट नहीं
बताया जा रहा है कि आईडीए को लेकर मुख्यमंत्री का रुख अभी भी स्पष्ट नहीं है. वहीं प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने भी मामला होल्ड पर डाल दिया है. वैसे हरिनारायण यादव आईडीए के पूर्व में उपाध्यक्ष और सुदर्शन गुप्ता दो बार विधायक रहे चुके हैं. ऐसी चर्चा है कि अध्यक्ष का निर्णय होने के बाद ही शहर के विधायकों से संचालक मंडल के नाम मांगे जाएंगे और आगे विचार किया जाएगा. आईडीए में अध्यक्ष के अतिरिक्त दो उपाध्यक्ष, एक महिला संचालक और चार संचालक के पद है. सीईओ बोर्ड के सचिव होते हैं.
