हमीरपुर नाव हादसे में मृत सभी छह यात्रियों के शव मिले

हमीरपुर, 7 मई (वार्ता) उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुरारा क्षेत्र में यमुना नदी में नाव पलटने से महिला समेत छह लोगों की मौत हो गई। गुरुवार देर शाम एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने सभी शव बरामद कर लिए। यह हादसा छोटी नाव में क्षमता से अधिक लोगों और खरबूजों की बोरियां लादने के कारण हुआ।

पुलिस के अनुसार कुरारा क्षेत्र के कोतूपुर गांव में बुधवार देर शाम एक शादी समारोह के बाद नौ लोग छोटी मछली पकड़ने वाली नाव से नदी किनारे स्थित बारी में खरबूजा खाने और तोड़ने गए थे। लौटते समय नाव में कई बोरी खरबूजे भी रख लिए गए। बीच धारा में पहुंचते ही एक बोरी पानी में गिर गई, जिसे बचाने के प्रयास में सभी लोग नाव के एक ओर आ गए और संतुलन बिगड़ने से नाव पलट गई।

हादसे में ब्रजरानी पत्नी पप्पू निवासी मनकी कला, उसका पांच वर्षीय पुत्र लाब्यांश, आकांक्षा पुत्री रामहेत निवासी भटपुरा थाना कुरारा, आदित्य पुत्र महेश निवासी घाटमपुर, अर्चना पुत्री सर्वेश निवासी घाटमपुर तथा रानी पुत्री बच्चन निवासी कोतूपुर नदी में डूब गए। वहीं नाव चालक विष्णु पुत्र रामस्वरूप, रिंकू पुत्र राजू और पारुल पुत्री बउउन को दूसरी नाव में मौजूद मछुआरों ने किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी अभिषेक गोयल, पुलिस अधीक्षक मृगांक शेखर पाठक, चित्रकूटधाम मंडल के डीआईजी, एडीजी प्रयागराज, पिछड़ा वर्ग आयोग की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी निरंजन ज्योति, हमीरपुर के चेयरमैन कुलदीप निषाद तथा सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर पहुंचे।

एनडीआरएफ की टीम ने गुरुवार दोपहर तक पांच शव बरामद कर लिए थे, जबकि शाम को कड़ी मशक्कत के बाद आदित्य का शव भी खोज निकाला गया। घटना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन ने आपदा राहत मद से प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की है। जिला दैवीय आपदा विशेषज्ञ प्रियेश रंजन मालवीय ने बताया कि नदी में डूबने से मृत्यु होने पर शासन की ओर से यह सहायता दी जाती है।

इस हृदयविदारक घटना में मां-बेटे की मौत ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। बताया गया कि पांच वर्षीय लाब्यांश खरबूजा खाने जाने की जिद कर रहा था। उसकी मां ब्रजरानी पहले उसे रोक रही थी, लेकिन बाद में पुत्र मोह में स्वयं भी नाव पर बैठ गई ताकि बच्चा सुरक्षित रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव डूबने के दौरान ब्रजरानी अपने बेटे को सीने से लगाए रही। बाद में मां और बेटे के शव पास-पास मिले, जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

ग्रामीणों के अनुसार छोटी नाव में जरूरत से ज्यादा लोगों और खरबूजों की बोरियां भर लेने से हादसा हुआ। नाव मूल रूप से चार-पांच लोगों के बैठने योग्य थी, लेकिन उसमें नौ लोग सवार थे। बीच नदी में संतुलन बिगड़ने से कुछ ही क्षणों में नाव पलट गई और बड़ा हादसा हो गया।

 

 

 

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