
भोपाल। किसानों के साथ अन्याय, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपर्याप्त खरीदी और कृषि उपज के उचित दाम नहीं मिलने के मुद्दे पर कांग्रेस ने गुरुवार को मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ अपना आंदोलन और तेज कर दिया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में राज्य भर में व्यापक “चक्काजाम” आंदोलन आयोजित किया गया, जिसमें मुंबई–आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-3) सहित कई प्रमुख मार्गों को जाम किया गया।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि आंदोलन में प्रदेश भर से लाखों किसान और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी के अनुसार लगभग 747 किलोमीटर क्षेत्र में हुए इस आंदोलन में सांसदों, विधायकों, जिला अध्यक्षों और संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भागीदारी की।
मुरैना में कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य कमलेश्वर पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह और विधायक हेमंत कटारे आंदोलन में शामिल हुए। ग्वालियर में राज्यसभा सांसद अशोक सिंह और कांग्रेस सह-प्रभारी संजना जाटव ने संभागीय विधायकों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
शिवपुरी में पूर्व मंत्री के.पी. सिंह और प्रदेश महासचिव यादवेन्द्र सिंह आंदोलन में मौजूद रहे, जबकि गुना में पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
शाजापुर में आयोजित प्रमुख प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, सह-प्रभारी संजय दत्त, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य मीनाक्षी नटराजन, विधायक महेश परमार और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा शामिल हुए।
इंदौर में भी जीतू पटवारी ने सह-प्रभारी उषा नायडू के साथ आंदोलन में भाग लिया। वहीं खलघाट में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, सह-प्रभारी रणविजय सिंह लोचव, पूर्व मंत्री बाला बच्चन और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सचिन यादव सड़क जाम आंदोलन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने भाजपा सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान अब जागरूक हो चुका है और अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतर आया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि 2023 विधानसभा चुनाव से पहले किसानों से किए गए वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि गेहूं की खरीद ₹2700 प्रति क्विंटल के वादे का क्या हुआ। पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार सीमित मात्रा में ही खरीद कर रही है, जिससे किसान अपनी उपज खुले बाजार में कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि धान के लिए ₹3100 प्रति क्विंटल और सोयाबीन के लिए ₹6000 प्रति क्विंटल देने के वादे भी किसानों के साथ छल साबित हुए हैं। पटवारी का आरोप था कि किसानों की आय बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, जबकि प्रदेश का बड़ा किसान वर्ग आज भी कर्ज में डूबा हुआ है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए तीन वर्ष का समय दिया, लेकिन किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को पंचायत स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की आवाज उठाने पर यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, तो कार्यकर्ता जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री निवास का घेराव और प्रतीकात्मक तालाबंदी आंदोलन भी किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि समर्थन मूल्य और खरीदी व्यवस्था की अव्यवस्थाओं के कारण किसान अपनी फसल सड़क पर फेंकने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार इस संकट के प्रति संवेदनशील नहीं है।
सिंघार ने कहा कि सत्तारूढ़ दल मध्य प्रदेश के किसानों की समस्याओं से ज्यादा पश्चिम बंगाल की राजनीति में व्यस्त दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि किसान सरकार की कार्यशैली को देख रहा है और समय आने पर राजनीतिक जवाब भी देगा।
