भारत की सैन्य शक्ति रक्षा उद्योगों के कारखानों में निर्मित होती है : संजय सेठ

नयी दिल्ली, 05 मई (वार्ता) रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय रक्षा बलों के अद्वितीय साहस और दृढ़ संकल्प को देते हुए कहा है कि अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों और प्रणालियों ने इसे और मजबूत बनाया है।

श्री सेठ ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मंगलवार को ’नॉर्थ टेक संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ तथा स्टार्ट-अप को देश के ब्रांड एंबेसडर बताया। उन्होंने कहा कि स्टार्ट-अप और एमएसएमई भविष्य की वृद्धि के प्रेरक बल हैं और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे हमारे युग के विश्वकर्मा हैं।

रक्षा राज्य मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर भारत के शत्रुओं की कुटिल योजनाओं को विफल करने के लिए रक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘मेड-इन-इंडिया’ उपकरणों का प्रभावी उपयोग इस बात का प्रमाण है कि पूरा देश—सरकार, रक्षा सार्वजनिक उपक्रम और निजी क्षेत्र, विशेषकर नवप्रवर्तक, स्टार्ट-अप और एमएसएमई—रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए संकल्पित है।

श्री सेठ ने कहा कि रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात के आंकड़े ‘नए भारत’ के उदय का प्रमाण हैं, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए क्षमताओं को मजबूत करने में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा, “यह नया भारत न तो किसी पर बुरी नजर डालता है और न ही कोई उसकी संप्रभुता को चुनौती दे तो वह चुप बैठता है।”

रक्षा राज्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज की तकनीक कल अप्रासंगिक हो सकती है इसलिए उद्योग जगत को वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तकनीकी दृष्टि से आगे रहने के लिए नई सोच अपनानी चाहिए़। उन्होंने देश के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की पहलों को रेखांकित किया और कहा कि नवाचार एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें सरकार का पूरा समर्थन रहेगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक गलियारे के परिवर्तनकारी प्रभाव को स्वीकार करते हुए उद्योग जगत से इसे और ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।

केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने उद्योग जगत से रक्षा बलों के साथ मिलकर उभरते क्षेत्रों में वर्तमान परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने और भारतीय सेना को भविष्य के लिए तैयार बल बनाने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता, तकनीकी संप्रभुता और परिचालन अनुकूलन प्राप्त होगा।

तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 का आयोजन भारतीय सेना की उत्तरी और केंद्रीय कमानों तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स द्वारा ‘रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां तकनीक, उद्योग और सैनिकता का संगम होता है’ विषय पर किया गया है।

 

 

 

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