बरगी बांध क्रूज हादसा: चाचा, भतीजे का शव भी मिला

जबलपुर। बरगी क्रूज हादसे का शिकार हुए चाचा-भतीजे का शव भी रविवार को मिल गया । सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ होमगार्ड, पुलिस की सर्चिंग के दौरान सुबह करीब 6 बजे 9 वर्षीय मयूरन और सुबह करीब साढ़े नौ बजे वेस्टलैण्ड खमरिया निवासी कामराज का बरामद कर लिया गया । इसके साथ ही मृतकों की संख्या 13 पहुंच गई और सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हुआ। वहीं 13 मौतों पर बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। ये कार्रवाई रहम जैसी लग रही है । छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई औरवास्तविक जिम्मेदार अधिकारियों पर पर्दा डालने जैसा लग रहा है । असली चेहरे बेनकाब हो। जब हादसे में लापरवाही उजागर हो चुकी है तो जिम्मेदार किस बात का इंतजार कर रहे है ये समझ से परे है। जबकि मप्र पर्यटन निगम की लापरवाही उजागर हो चुकी है। क्रूज में लाइफ जैकेट समय पर पर्यटकों को मुहैया नहीं होना, मानकों, नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। क्रूज जब डूबने की कगार पर पहुंचा तब लाइफ जैकेट बांटी गई। आरोप यहां तक लग चुके है कि क्रूज समेत वाटर स्पोट्र्स गतिविधियों का संचालन तो हो रहा था, लेकिन सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। गाइडलाइन के साथ नियमों को ताक में रखा गया ।

हादसा नहीं, हत्या हुई, मुआवजा नहीं न्याय चाहिए

रविवार को जब कामराज और उसके भतीजे का शव निकाला गया तो परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा वे रोते बिलखते रहे। आक्रोशित परिजनों ने कहा कि यह हादसा नहीं, हत्या है। हमें मुआवजा नहीं, न्याय चाहिए। जिस हादसे का जिम्मेदार एमपी टूरिज्म डिपार्टमेंट है। उन्होंने सवाल उठाया कि अब तक कितने अफसर गिरफ्तार किए कितने सस्पेंड किए गए। बोट बॉपरेटर कहां है उसे क्यों नहीं गिरफ्तार किया जा रहा है। परिजनों ने यह भी कहा कि कामराज का वेतन एक लाख रूपए था। सहायता राशि नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती है हमें मुआवजा नहीं सिर्फ न्याय चाहिए। उन्होंने शासन-प्रशासन से मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

जन्मदिन मनाया, लहरें चली, क्रूज हिला और डूब गया, रस्सी के सहारे बची जान-

हादसे में सुरक्षित बचे दस वर्षीय पूविथरन ने बताया कि

जब सफर के लिए क्रूज पर चढ़े थे तब मौसम साफ था। क्रूज पर एक बच्चे का जन्मदिन भी मना। जब वापिस लौट रहे थे तभी तेज आंधी चली। लहरें चलने लगी। लहरों के साथ क्रूज बेकाबू हुआ। हादसे के पहले क्रूज पर केवल बच्चों ने लाइफ जैकेट पहनी थी। जब क्रूज डूबने की कगार पर पहुंचा तब लोगों ने जैकेट पहनना शुरू किया था लेकिन जब तक देर हो गई थी। क्रूज पलटने के बाद वे लहरों से लड़ते हुए किनारे की ओर आ रहा था तभी एक अंकल ने रस्सी फेंकी जिसे पकडक़र उसने अपनी जान बचाई।

आयुध कारखाने में नौकरी करता था कामराज

चौथे दिन कामराज का शव मिला वे तिरुची आयुध कारखाने में प्रशिक्षु प्रशिक्षण पूरा किया था और एक साल पहले ही वे जबलपुर आयुध कारखाने में उसकी ड्यूटी लगी थी। मशीनिस्ट के पद पर थे। वे यहां पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे। उसका 10 वर्षीय बड़ा बेटा पुविथारन जबलपुर के एक स्कूल में कक्षा 6 में पढ़ाई करता था। गर्मी की छुट्टियां पर जाने के कारण उनकी पत्नी करकुझली ने अपने माता-पिता वदिवेल और मरियम्मल, भाभी सौभाग्या और उनके बच्चों इनिया और मयूरन को जबलपुर बुलाया था तमिलनाडु से उनके सास-ससुर, छोटे भाई, साली और अन्य परिजन आए हुए थे। इसलिए उन्होंने छुट्टी ले ली थी। गुरुवार 30 अप्रैल को सभी लोग घूमने निकले। दोपहर में वे भेड़ाघाट गए। वहां रोप-वे का आनंद लेने के बाद करीब 3:30 बजे बरगी डैम रिजॉर्ट पहुंचे थे और हादसे का शिकार हो गए थे। हादसे के दौरान 10 वर्षीय बेटा पुविथारन लहरों के सहारे किनारे पर आ गया था, जिसे सुरक्षित बचा लिया गया था लेकिन छोटा बेटा श्रीतमिलवेंदन और भतीजा मयूरन समेत खुद कामरान डूब गया था। रविवार को चाचा-भतीजे का शव बरामद हुआ ।

खुशियों के सफर का खौफनाक अंत, 4 दिन में 13 लाशें

बरगी बांध में गुरुवार शाम से शुरू हुआ खुशियों के सफर का खौफनाक अंत हुआ है। सैर-सपाटे और हंसी-मजाक के बीच शुरू हुआ क्रूज का कभी न भरने वाला जख्म दे गया है। क्रूज पर सवार पर्यटक जब कुदरत की खूबसूरती और लहरों का आनंद ले रहे थे। क्रूज बांध की लहरों पर हिचकोले खाते हुए आगे बढ़ा, सभी अपनी मस्ती में डूब गए लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शाम शाम 5:50 बजेे तूफान काल बनकर आया। अचानक आंधी चलने के बाद क्रूज हिलने लगा, निचले हिस्से में पानी भरने लगा। संतुलन बिगड़ा क्रूज एक तरफ झुका और शाम 6 बजे क्रूज चंद मिनट में चीत्कार के बीच डूब गया था। पहले दिन चार तो दूसरे दिन पांच, तीसरे दिन दो, चौथे दिन दो शव निकले। 29 लोगों की किस्मत अच्छी थी जो उनकी जान बच गए थे। इस हृदय विदारक घटना ने हर किसी को झकझोर दिया बल्कि सुरक्षा व्यवस्था भ्ीा कटघरे में आ गई। क्रूज पायलट महेश पटेल, क्रूज हेल्पर छोटेलाल गोंड एवं टिकट काउंटर प्रभारी बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त हुई। होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित किया गया और रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच किया गया था।

सबसे सुरक्षित का दावा तो कैसे डूबा, येलो अलर्ट में किसके कहने पर हुआ संचालन

जानकारों की माने तो जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी। 19 वर्ष से लगातार चल रहा था। बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है। क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। हादसे के बाद सुरक्षा पर सवाल उठ गए है। तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ था। सवाल यह उठ रहा है कि जब सबसे सुरक्षित कू्रज होने का दावा रहा था फिर एक झटके में वे कैसे डूब गया। यात्रा शुरू होने से पहले हर यात्री को लाइफ जैकेट देना और पहनाना अनिवार्य है, लेकिन इस नियम का पालन क्यों नहीं किया गया। मौसम विभाग पहले ही येलो अलर्ट जारी कर चुका था उसके बावजूद भी क्रूज का संचालक किसके कहने पर किया गया समेत अनेक सवाल उठ रहे है लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं है ।

इन्होंने गंवाई जान

हादसे में नीतू सोनी (43) निवासी कोतवाली जबलपुर, सोभाग्यम अलागन (42) निवासी अन्नानगर, वेस्ट तारापुरम, टी.के. थाना मुनगर, तिरूपूरूर तमिलनायडू , काकुलाझी (38) निवासी खमरिया, मधुर मैसी (62) निवासी खाजन बस्ती थाना न्यू दिल्ली, त्रिशान (4) निवासी खजान बस्ती नांगल राया, न्यू दिल्ली, मरीन मैसी खजान न्यू दिल्ली, रेशमा सैयद (66) निवासी सिविल लाइन जबलपुर, शमीम नकवी (66) निवासी डेरखी भोपाल, ज्योति श्रीवास (34) निवासी फूटाताल घमापुर जबलपुर, विजरा सोनी निवासी कोतवाली, तमिल निवासी खमरिया एवं 9 वर्षीय मयूरम और 40 वर्षीय कामराज की मौत हुई है।

कोशिश की, सफल नहीं हो पाए

मुख्यालय अटैच हुए पर्यटन विभाग के रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा का बयान सामने आया है उनका दावा है कि क्रूज का संचालक नियमानुसार किया जा रहा था। शाम 5: 25 बजे पर क्रूज निकला था। उस समय मौसम साफ था लेकिन वापिस लौटते समय शाम 6:10 बजे मौसम बिगड़ा। तूफान आया। कैप्टन ने क्रूज किनारे लगाने की पूरी कोशिश की थी लेकिन सफलता नहीं मिल पाई ।

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