छतरपुर: शहर में बीती रात एक बैल संकरी और गहरी नाली में गिरकर मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करता रहा। इस दौरान घंटों तक वह छटपटाता रहा, लेकिन संकरी जगह होने के कारण बाहर नहीं निकल सका। इस संकट की घड़ी में नगरपालिका की अनुपस्थिति के बीच हरिओम गौशाला के सदस्यों ने कमान संभाली और ड्रिलर मशीन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर बैल की जान बचाई।
ड्रिलर से चौड़ी की जगह, रस्सियों का लिया सहारा
घटना देर रात की है, जब एक आवारा बैल अचानक गली की गहरी नाली में जा गिरा। सूचना मिलते ही हरिओम गौशाला की टीम मौके पर पहुंची। नाली इतनी संकरी थी कि बैल को निकालना नामुमकिन लग रहा था। टीम ने हार नहीं मानी और तत्काल ड्रिलर मशीन मंगवाई। स्लैब को तोड़कर जगह चौड़ी की गई और फिर रस्सियों के सहारे कड़ी मशक्कत के बाद बैल को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बैल को आई चोटों का प्राथमिक उपचार कर उसे गौशाला भेज दिया गया है।
नपा की गैर-मौजूदगी पर जनता का फूटा गुस्सा
इस पूरे रेस्क्यू के दौरान नगरपालिका की उदासीनता साफ नजर आई। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि घटना की सूचना तत्काल जिम्मेदार अधिकारियों और नपा कर्मचारियों को दी गई थी, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा। लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि लाखों का बजट होने के बावजूद इमरजेंसी सेवाओं के नाम पर नगरपालिका नदारद रहती है।
बजट लाखों में, पर सिस्टम ‘फेल’
शहरवासियों का कहना है कि आवारा पशुओं के प्रबंधन और सुरक्षा के नाम पर हर साल प्रशासन लाखों रुपये खर्च करने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। यदि गौशाला के सदस्य समय पर नहीं पहुंचते, तो बैल की जान भी जा सकती थी। लोगों ने मांग की है कि आवारा पशुओं के लिए शहर में ठोस इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को टाला जा सके
