सीहोर। जिला मुख्यालय स्थित साइलो गेहूं खरीदी केंद्र पर इन दिनों अव्यवस्थाओं का आलम किसानों के लिए भारी मुसीबत बन गया है. समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने पहुंचे किसान घंटों चिलचिलाती धूप में खड़े रहने को मजबूर हैं. केंद्र के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, लेकिन खरीदी की प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है, जिससे किसानों की परेशानी और बढ़ती जा रही है.
किसानों का कहना है कि केंद्र पर मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न ही बैठने के लिए कोई छायादार स्थान. तेज गर्मी के बीच किसान अपनी बारी का इंतजार करते-करते थक चुके हैं. कई किसान सुबह से लाइन में लगे रहते हैं, लेकिन शाम तक भी उनकी ट्रॉली तौल के लिए अंदर नहीं जा पाती. इस अव्यवस्था के चलते किसानों में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है.
जब परेशान किसान अपनी समस्या लेकर केंद्र कार्यालय पहुंचे, तो वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला. कर्मचारियों के माध्यम से जब अधिकारियों से मोबाइल पर बात कराई गई, तो उनका रवैया भी संतोषजनक नहीं रहा. किसानों का आरोप है कि अधिकारियों ने साफ कह दिया कि जब पर्याप्त संख्या में ट्रॉलियां इक_ी हो जाएंगी, तभी खरीदी शुरू की जाएगी। इस तरह का जवाब किसानों के लिए और अधिक निराशाजनक साबित हो रहा है.
ग्राम बिजौरी के किसान पिंटू वर्मा बताते हैं कि वे एक दिन पहले भी ट्रॉली लेकर आए थे, लेकिन छुट्टी होने का हवाला देकर उन्हें वापस भेज दिया गया. अगले दिन फिर सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन अब भी स्पष्ट नहीं है कि उनका गेहूं तौला जाएगा या नहीं। वहीं ग्राम बावडिय़ा के किसान अंकित राजपूत का कहना है कि सुबह से इंतजार करने के बावजूद अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका आरोप है कि जब तक 100-200 ट्रॉलियां नहीं भर जातीं, तब तक खरीदी शुरू नहीं की जाती, जिससे किसानों का समय और श्रम दोनों व्यर्थ हो रहे हैं.
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनसे अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। थके-हारे किसान जब अपनी बारी या प्रक्रिया के बारे में पूछते हैं, तो उन्हें संतोषजनक जवाब देने के बजाय डांट-फटकार का सामना करना पड़ता है. इससे किसानों में नाराजगी और असंतोष और बढ़ रहा है.
कागजों में व्यवस्था बेहतर दिख रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ‘अन्नदाताÓ को अपनी ही उपज बेचने के लिए इस तरह की परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है. यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो किसानों का आक्रोश और बढ़ सकता है, जो प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है.
प्रशासन के निर्देश, जमीनी हकीकत अलग
हालांकि जिला प्रशासन की ओर से खरीदी व्यवस्था को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर बालागुरू के ने कहा है कि किसानों को स्लॉट बुकिंग के आधार पर निर्धारित समय पर ही केंद्र बुलाया जाए, ताकि अनावश्यक भीड़ से बचा जा सके. साथ ही उन्होंने खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रखने तथा किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं. किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही गई है.
आंकड़ों में खरीदी की स्थिति
जिले में गेहूं उपार्जन के लिए 1 लाख 2 हजार 485 किसानों का पंजीयन किया गया है, जिनमें से 67 हजार 66 किसान स्लॉट बुक कर चुके हैं. अब तक लगभग 40 हजार किसानों से 2.10 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है. इनमें से 56 प्रतिशत किसानों को भुगतान भी किया जा चुका है.
