नर्मदा नदी में मिल रहा काला पानी, जिम्मेदारों का तर्क बारिश के कारण हुआ

जबलपुर : आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र ग्वारीघाट का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। वायरल होते वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ग्वारीघाट क्षेत्र से होकर गुजरने वाला गंदा पानी सीधा घाटों के ज़रिए नर्मदा नदी में मिल रहा है। जो न सिर्फ मां नर्मदा नदी की पवित्रता पर सवाल खड़े कर रहा है बल्कि यहां आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की आस्था पर भी चोट पहुंचा रहा है। वही जब वायरल होते इस वीडियो में दिखाए जा रहे गंदे पानी के बारे में निगम के जिम्मेदारों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह कोई दूषित पानी नहीं बल्कि एसटीपी यानि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकला हुआ पानी है जो सीधे मां नर्मदा में मिल रहा है। हालांकि नवभारत किसी भी प्रकार के वायरल होते वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। लेकिन एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि, क्या नर्मदा नदी में मिलने वाला पानी वाकई एसटीपी से निकला हुआ पानी है? अगर ऐसा है तो फिर इस पानी का रंग काला क्यों नजर आ रहा है।
बारिश के कारण हुआ काला
नर्मदा नदी में मिलते काले पानी को लेकर जब नगर निगम के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विगत दो-तीन दिनों से हो रही बेमौसम बरसात के कारण नर्मदा नदी में मिलने वाला पानी काला हो गया है। अब सवाल यह भी उठता है कि प्लांट से निकलने वाला पानी एकाएक काला कैसे पड़ गया है?
खराब हुए चेंजिंग रूम
ग्वारीघाट के प्रमुख घाटों में महिलाओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। दिनभर में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही के बावजूद यहां पर्याप्त और सुरक्षित वस्त्र बदलने के कक्ष की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे महिलाओं को असुविधा और असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार नगर निगम द्वारा वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक अस्थायी चेंजिंग रूम बनवाने की योजना बनाई थीं। परंतु आलम यह है कि यहां बने कुछ चेंजिंग रूम अब जर्जर होकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पुराने ढांचे टूटने के बाद नगर निगम द्वारा नए चेंजिंग रूम नहीं लगाए गए हैं। वही उमाघाट सहित नर्मदा के अन्य प्रमुख घाटों पर बने चेंजिंग रूम या तो बेहद कम हैं, या फिर उनकी हालत बेकार हो चुकी है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार मई 2022 में तत्कालीन कलेक्टर इलैयाराजा टी ने नगर निगम अधिकारियों के साथ घाटों का निरीक्षण किया था। उस दौरान प्रत्येक घाट पर कम से कम तीन अतिरिक्त चेंजिंग चैंबर्स बनाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन आज तक उस घोषणा पर कोई अमल नहीं किया गया है।
रोज़ की कहानी
सिर्फ़ त्योहारों पर ही नहीं आम दिनों में भी महिलाओं को चेंजिंग रूम को लेकर दिक्कतो का सामना करना पड़ता है। लेकिन इन सब से अनजान प्रशासन आज भी अपनी निगाहे फेरे हुए है। वही कई स्थानों पर ये कक्ष गंदगी और अतिक्रमण की चपेट में हैं, जिससे महिलाओं की निजता प्रभावित हो रही है। वही छठ पूजा जैसे बड़े अवसरों पर बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु घाटों पर पहुंचती हैं। चेंजिंग रूम की व्यवस्था न होना नगर निगम की तैयारियों और महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सतर्कता पर सवाल खड़े करता है।
योजनाएं सिर्फ कागजों तक……
चर्चाओं के अनुसार प्रशासन के द्वारा सरयू नदी के तट की तर्ज पर गौरीघाट के पुनर्विकास में आधुनिक सुविधाओं से लैस चेंजिंग रूम शामिल करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, इन योजनाओं के बावजूद जमीनी हकीकत में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। हाल फिलहाल तो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस स्थल पर ऐसी स्थिति प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है। निगम द्वारा योजनाएं तो रोज़ बनाई जाती है, लेकिन इसका असर जमीन पर होता नहीं दिखाई देता है।
इनका कहना है
मां नर्मदा नदी में मिलने वाला पानी एसटीपी प्लांट से निकल रहा है। यह पानी दूषित पानी नहीं है।
कमलेश श्रीवास्तव, कार्य. यंत्री जल

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