आर्थिक प्रगति की रीढ़ हैं हमारे युवा

सोमवार को स्वामी विवेकानंद जयंती पूरे देश में युवा दिवस के रूप में मनाई गई . भारत आज जिस आत्मविश्वास के साथ 21वीं सदी में आगे बढ़ रहा है, उसके केंद्र में देश की युवा शक्ति है. औसत आयु लगभग 28 वर्ष होने के कारण भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है. यह केवल जनसांख्यिकीय आंकड़ा नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक बदलावों की सबसे बड़ी ऊर्जा है. जिस देश की आधी से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की हो, वहां संभावनाओं की कोई सीमा नहीं होती, बशर्ते दिशा सही हो और अवसर मिलें.

भारतीय युवाओं ने देश की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार दी है. स्टार्टअप इंडिया की सफलता, यूनिकॉर्न कंपनियों की बढ़ती संख्या और डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार इसका प्रमाण हैं. आज वैश्विक मंच पर भारतीय युवा आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक, हेल्थटेक और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व कर रहे हैं. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, आईबीएम जैसी वैश्विक कंपनियों में भारतीय युवाओं की निर्णायक भूमिका केवल प्रतिभा का नहीं, बल्कि भारत के बदलते सामर्थ्य का संकेत है. देश के भीतर भी युवा उद्यमी रोजगार मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन रहे हैं.

युवा केवल आर्थिक शक्ति नहीं, सामाजिक परिवर्तन के संवाहक भी हैं. लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और समावेशी विकास जैसे मुद्दों पर युवाओं की भागीदारी पहले से कहीं अधिक मुखर और संगठित है. स्वच्छ भारत, जल संरक्षण, डिजिटल साक्षरता और स्वयंसेवी आंदोलनों में युवाओं की सक्रियता ने सामाजिक चेतना को नया आयाम दिया है. सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवा न केवल अपनी आवाज उठा रहे हैं, बल्कि समाज को जवाबदेह भी बना रहे हैं. दरअसल,लोकतंत्र की मजबूती में युवाओं की भूमिका निर्णायक होती जा रही है. मतदान प्रतिशत में युवाओं की बढ़ती भागीदारी, छात्र राजनीति से लेकर पंचायत और संसद तक उनकी उपस्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था को नई ऊर्जा देती है. युवा नेता नीतियों में पारदर्शिता, तकनीक आधारित शासन और विकास-केंद्रित राजनीति की मांग कर रहे हैं. इससे भारतीय राजनीति में विमर्श का स्तर बदला है और भविष्य की दिशा अधिक स्पष्ट हुई है.भारतीय युवा विज्ञान और अनुसंधान में भी नई ऊंचाइयां छू रहे हैं. अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर जैव-प्रौद्योगिकी तक युवा वैज्ञानिक भारत को आत्मनिर्भर बना रहे हैं. खेलों में ओलंपिक और विश्व मंचों पर भारतीय युवाओं की उपलब्धियां देश का सिर गर्व से ऊंचा कर रही हैं. वहीं सिनेमा, संगीत, योग और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से युवा भारत की सांस्कृतिक शक्ति को वैश्विक पहचान दिला रहे हैं.आज भारतीय युवा दुनिया भर में केवल नौकरीपेशा नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, नवप्रवर्तक और विचारक के रूप में पहचाने जा रहे हैं. ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों की आत्मा युवा ही हैं. सही नीति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल विकास के साथ यह युवा शक्ति भारत को विकसित राष्ट्र की ओर ले जाने में निर्णायक साबित होगी.कुल मिलाकर युवा शक्ति भारत के वर्तमान की सबसे मजबूत ताकत है,जो देश को भीतर से सशक्त और बाहर से प्रभावशाली बना रही है.

 

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