सतना: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत सतना जिले में ईपीएफ को लेकर छह करोड़ रुपये का बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। कर्मचारियों के वेतन से हर माह ईपीएफ की कटौती तो की जा रही थी, लेकिन यह राशि कर्मचारियों के खातों में जमा नहीं की गई। इस गंभीर मामले की जांच के लिए राज्य वित्त विभाग की तीन सदस्यीय टीम गुरुवार को सतना पहुंची और पूरे दिन जांच में जुटे रही।वित्त विभाग की डिप्टी डायरेक्टर मुमुल बहोत, स्टेट फाइनेंस मैनेजर मनोज राजपूत और एचएमआईएस कंसल्टेंट नीरज श्रीवास्तव की टीम सुबह 11:30 बजे से शाम 6 बजे तक जिला मुख्यालय पर सक्रिय रही।
टीम ने जिला डिस्ट्रिक्ट एकाउंट मैनेजर सुभाष चंदेल से वर्ष 2021 से 2025 तक के पूरे ईपीएफ और ईएसआई चालानों सहित संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। टीम ने बजट पेंडेंसी और रिकॉर्ड रखरखाव में आई गड़बडिय़ों पर नाराजगी व्यक्त की तथा डैम के बयान भी दर्ज किए। सूत्रों के अनुसार टीम ने सभी ब्लॉक एकाउंट मैनेजरों को भी तलब किया था। अब टीम इन दस्तावेजों का सॉफ्टवेयर से मिलान कर रिपोर्ट तैयार करेगी।जानकारी के अनुसार एनएचएम के संविदा कर्मचारियों के वेतन से प्रतिमाह औसतन 1,800 रुपये ईपीएफ के रूप में काटे जा रहे थे। विभाग को समान राशि अपना अंशदान के रूप में जमा करनी थी, लेकिन पिछले चार वर्षों से यह राशि कर्मचारियों के ईपीएफ खातों में जमा नहीं की गई। इस गड़बड़ी की कुल राशि अब बढक़र लगभग 6 करोड़ रुपये पहुंच गई है। कई कर्मचारी लंबे समय से इस समस्या से परेशान थे। अक्टूबर माह में कर्मचारियों ने सीएमएचओ को शिकायत दी, लेकिन सुनवाई न होने पर मामला ईपीएफ आयुक्त कार्यालय तक पहुंच गया।
लग चुकी है पेनल्टी
सूत्रों की माने तो पूर्व में भी इसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग पर 55 लाख रुपये की पेनाल्टी लगाई जा चुकी है।कई एएनएम अब नियमित हो चुकी हैं, लेकिन उनके संविदाकाल का ईपीएफ अंशदान अभी तक जमा नहीं किया गया है। कर्मचारी जल्द से जल्द बकाया राशि जमा कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वित्त विभाग की टीम की जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
