नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (वार्ता) अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हज यात्रा के हवाई किराये में करीब दस हज़ार रुपये की बढ़ोतरी को लेकर विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उठ रहे सवालों के बीच कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के चलते बढ़ी लागत के बावजूद सरकार ने बातचीत के जरिए किराया वृद्धि को न्यूनतम रखने का प्रयास किया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर कहा, “असंख्य परिवारों के लिए, हज जीवन में एक बार पूरा होने वाला ऐसा सपना है जिसे उन्होंने वर्षों तक संजोकर रखा है। मैं इस भावना का तहे दिल से सम्मान करता हूँ।”
उन्होंने कहा कि लगातार चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण हवाई जहाज़ के ईंधन की कीमतों में वैश्विक स्तर पर भारी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में एयरलाइंस ने प्रति तीर्थयात्री 300–400 डॉलर की भारी बढ़ोतरी की मांग की थी। हवाई जहाज़ के ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के लिए एयरलाइंस को भी दोष नहीं दिया जा सकता। आपसी बातचीत और मोलभाव के ज़रिए हमने यह सुनिश्चित किया कि यह बढ़ोतरी केवल 100 तक ही सीमित रहे, जिससे हर तीर्थयात्री के काफ़ी पैसे बच गए। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला पूरी पारदर्शिता और नेक नीयत के साथ लिया गया, ताकि हज2026 व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कोई रुकावट न आए।
इससे पहले अल्पसंख्यक मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि मौजूदा मध्य-पूर्व संकट के कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल की कीमतों में वैश्विक स्तर पर तेज बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते एयरलाइंस ने प्रति यात्री 300 से 400 अमेरिकी डॉलर तक किराया बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, लंबी बातचीत और सभी हितधारकों से परामर्श के बाद सरकार ने केवल 100 डॉलर प्रति यात्री की सीमित और एकमुश्त बढ़ोतरी को मंजूरी दी, जिससे प्रत्येक यात्री को 200 से 300 डॉलर तक की राहत मिली।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कोई शोषण नहीं, बल्कि यात्रियों को बड़े आर्थिक बोझ से बचाने की कोशिश है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रही और यह निर्णय सद्भावना के साथ लिया गया ताकि हज 2026 की यात्रा में किसी प्रकार की बाधा न आए। वर्तमान में एक लाख से अधिक यात्री पहले ही पंजीकृत हो चुके हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि निजी टूर ऑपरेटर पहले ही अपने किरायों में भारी वृद्धि कर चुके हैं और बाद में करीब 150 डॉलर की अतिरिक्त बढ़ोतरी भी लागू की है ।

