भारत–केन्या ने की अपनी मुद्राओं में व्यापार पर चर्चा

नयी दिल्ली, 29 अप्रैल (वार्ता) अफ्रीका क्षेत्र में भारत के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार के रूप में उभर रहे केन्या के साथ नैरोबी में हुई एक बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की समीक्षा की है। दोनों देशों ने इसे और विस्तृत एवं मजबूत बनाने के अलावा अपनी मुद्राओं में व्यापार करने की संभावनाओं पर भी पर चर्चा की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार भारत-केन्या संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) की 27-28 अप्रैल को नैरोबी में हुई दसवीं बैठक में दोनों पक्षों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान को बढ़ावा देने की संभावना को स्वीकार किया है। यह उल्लेख किया गया कि केन्याई बैंकों ने भारतीय बैंकों के साथ विशेष रुपये पर आधारित वोस्त्रो खाते (एसआरवीए) खोले हैं, और इस व्यवस्था का अधिक उपयोग द्विपक्षीय लेनदेन को सुगम बना सकता है। बैठक में स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) तंत्र अपनाने की संभावना पर भी चर्चा की गई।

केन्या के लिए भारत एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार के रूप में उभरा है और दोनों के बीच व्यापार बढ़कर 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। बैठक में दोनों देशों ने व्यापार और निवेश संबंध मजबूत करने पर बातचीत की। इस सत्र की अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल और केन्या गणराज्य के व्यापार विभाग की प्रधान सचिव रेजिना अकोटा ओम्बम ने की। विज्ञप्ति के अनुसार दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि का उल्लेख किया, जिसमें भारत केन्या के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक के रूप में उभरा है। भारत और केन्या के बीच कुल व्यापार 2025-26 में 4.31 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें 2024-25 के 3.45 अरब अमेरिकी डॉलर से 24.91 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है।

यह चर्चा व्यापार विविधीकरण को बढ़ाने, बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को हल करने और इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में पूरकर्ताओं का लाभ उठाने पर केंद्रित थी। बैठक में मानकीकरण और अनुरूपता मूल्यांकन में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और केन्या मानक ब्यूरो (केईबीएस) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) और ही व्यापार सुविधा की अन्य पहलों पर चल रही बातचीत की प्रगति की समीक्षा की गयी। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और केन्या राजस्व प्राधिकरण (केआरए) के बीच आगमन से पहले सीमा शुल्क सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और व्यापार करने में आसानी में सुधार पर जोर दिया गया।

इस दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारत-केन्या वाणिज्य एवं उद्योग चैंबर के बीच एक और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। उभरते क्षेत्रों में क्षेत्रीय सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया। इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षेत्र में, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और निर्माण उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही ऑटोएक्सपो केन्या और ‘द बिग 5 कंस्ट्रक्ट केन्या’ जैसी प्रदर्शनियों में भागीदारी पर भी चर्चा हुई। रेलवे सहित अवसंरचना विकास में सहयोग पर भी विचार किया गया, जिसमें भारत ने केन्या की मानक गेज रेलवे के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, परियोजना प्रबंधन और रोलिंग स्टॉक की आपूर्ति में सहायता प्रदान करने की पेशकश की। भारतीय शिपयार्डों के साथ जहाज निर्माण में सहयोग के अवसरों की भी खोज की गयी। बैठक में भारत ने सस्ती जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति क्षमता की जानकारी दी। दोनों पक्षों ने स्वच्छता और पादप स्वच्छता बाधाओं को दूर करते हुए कृषि उत्पादों में व्यापार बढ़ाने पर भी चर्चा की।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में, भारत ने सौर और पवन परियोजनाओं सहित केन्या की स्वच्छ ऊर्जा 
पहलों का समर्थन करने की तत्परता व्यक्त की। केन्याई पक्ष ने सूचित किया कि उसने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर करने का अपना निर्णय बता दिया है और वह जल्द से जल्द इस पर हस्ताक्षर करने के लिए उत्सुक है।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर हुई चर्चा में यूपीआई जैसी भुगतान प्रणालियों, भारत कनेक्ट और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने वाले डिजिटल प्लेटफार्मों पर सहयोग शामिल था। क्षमता निर्माण को सहयोग के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में पहचाना गया। भारत ने भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम जैसी पहलों के तहत खनन, भूविज्ञान, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान किए। उच्च शिक्षा, डिजिटल शिक्षण प्लेटफार्मों और कौशल विकास में सहयोग के साथ-साथ “स्टडी इन इंडिया” कार्यक्रम के अंतर्गत छात्र गतिशीलता को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई। संयुक्त व्यापार सम्मेलन (जेटीसी) के दौरान, भारत-केन्या संयुक्त व्यापार मंच का आयोजन किया गया जिसमें दोनों देशों के उद्योग जगत की हस्तियों को विनिर्माण, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, अवसंरचना, डिजिटल प्रौद्योगिकी और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यापार और निवेश संबंधों का विस्तार करने के लिए एक मंच मिला। वाणिज्य सचिव श्री अग्रवाल की अध्यक्षता में वहां रह रहे भारतीय व्यापारिक समुदाय के साथ एक संवाद का आयोजन किया गया।

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