सौसर: सौसर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की हड़ताल ने आज गंभीर रूप ले लिया है। बीएमओ डॉ. योगेश शुक्ला को हटाने की पर अड़े स्वास्थ्य कर्मियों के काम बंद करने से अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह ‘वेंटिलेटर’ पर आ गई है। अस्पताल परिसर में इलाज की उम्मीद लेकर आए गरीब मरीज इलाज के अभाव में बैरंग वापस लौटने को मजबूर हैं।
सीएमएचओ की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए सवाल
एक ओर जहां पूरा अस्पताल स्टाफ बीएमओ के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम किए बिना ही सीएमएचओ ने डॉ. योगेश शुक्ला की छुट्टी आनन-फानन में स्वीकृत कर दी। हालांकि इस संबंध में सीएमएचओ से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन संपर्क नही हो पाया। श्री शुक्ला स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए छुट्टी पर चले गए हैं।
मरीजों की बढ़ी मुसीबत, स्वास्थ्य सेवाएं ठप
हड़ताल के कारण ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवाओं तक पर असर पड़ा है। अस्पताल की गलियां सूनी पड़ी हैं और वार्डों में भर्ती मरीजों की देखरेख चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के कंधे पर आ गई है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आए मरीज और उनके परिजन अस्पताल के गेट से ही वापस लौट रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण आज सौसर की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ हो गई है।
आर-पार की जंग के मूड में कर्मचारी
हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों और कर्मचारियों का साफ कहना है कि जब तक बीएमओ योगेश शुक्ला को स्थायी रूप से यहां से नहीं हटाया जाता, तब तक वे काम पर नहीं लौटेंगे। स्टाफ की इस जिद और प्रशासन की सुस्ती के बीच आम जनता पिस रही है। अपना इलाज कराने आए मंशा सिल्लू का कहना है कि अस्पताल में न डॉक्टर मिल रहे हैं न दवा। हम बीमार मरीज को लेकर आए थे, लेकिन यहां कोई सुनने वाला नहीं है। आखिर हमारी गलती क्या है।बहरहाल खबर लिखे जाने तक हड़ताल जारी थी। इधर प्रभारी एसडीएम प्रियंक मिश्रा ने नवभारत से चर्चा करते हुए कहा कि हड़ताली डॉक्टर, कर्मचारीयो से बात चित चल रही है, मामले को शीघ्र सुलझा लिया जाएगा।
