इंदौर: जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीईओ सिद्धार्थ जैन ने शिक्षा विभाग में सामने आए कथित वित्तीय गबन मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. यह मामला रुपये के गबन से जुड़ा बताया जा रहा है.सीईओ सिद्धार्थ जैन ने सोमवार को जिला शिक्षा अधिकारी शांता स्वामी को आदेश दिए कि इस पूरे मामले में एमजी रोड थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाए. आदेश के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने अब तक की जांच रिपोर्ट और सभी आवश्यक दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं. हालांकि खबर लिखे जाने तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है.
सीईओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन-जिन लोगों के बैंक खातों में संदिग्ध राशि ट्रांसफर हुई है, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाएगी और वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी. उन्होंने बताया कि कुछ मामले ऐसे हैं जिनमें संबंधित लोग रिटायर हो चुके हैं, ऐसे में उनसे वसूली उनकी पेंशन से की जाएगी. इसके अलावा 2016 से 2022 के बीच जिन अधिकारियों के कार्यकाल में लापरवाही पाई गई है, उन पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है. सूत्रों के अनुसार इस दौरान पदस्थ रहे सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) की भूमिका की भी जांच की जा रही है. जल्द ही इस आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है.
अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं
इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वर्ष 2016 से दिसंबर 2022 तक बीईओ इंदौर के पद पर रहे पांच शिक्षा अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी या नहीं. बताया जाता है कि जिला कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा कोष एवं लेखा विभाग के माध्यम से कराई गई जांच में यह सामने आया है कि गबन की राशि का ट्रांजैक्शन ओटीपी के जरिए इन्हीं अधिकारियों के माध्यम से हुआ था.
कम्प्यूटर ऑपरेटर के दिए थे पासवर्ड
जांच में यह भी सामने आया है कि एक भृत्य सिद्धार्थ जोशी को कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य सौंपा गया था और उसे लॉगिन आईडी व पासवर्ड भी दिए गए थे, जिसके जरिए वित्तीय लेन-देन किए गए. जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं उनमें तत्कालीन बीईओ हीरालाल खुशाल, ओपी वर्मा और महेश खोटे शामिल बताए जा रहे हैं. फिलहाल पूरा मामला जांच और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया में है
