जबलपुर: समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीद के सरकारी वादों के बीच किसानों को इस साल भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के करीब 51 हजार किसानों ने पंजीयन कराया, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी और तकनीकी खामियों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भारत कृषक समाज महाकौशल प्रांत के अध्यक्ष इंजी. के के अग्रवाल के अनुसार, प्रशासन द्वारा फसल का भौतिक सत्यापन कराने के बावजूद कई किसानों की जमीन पोर्टल पर असत्यापित दिख रही है। सेटलाइट डेटा की गड़बड़ी के कारण राजस्व अधिकारियों और किसानों के बीच विवाद की स्थिति बन रही है।
स्लॉट बुकिंग बना सिरदर्द
किसान रात-रात भर जाग कर स्लॉट बुकिंग की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सर्वर की धीमी गति और तकनीकी समस्याओं के चलते उन्हें सफलता नहीं मिल रही। अंतिम तिथि 9 मई नजदीक होने से उनकी चिंता और बढ़ गई है। भारत कृषक समाज ने मुख्यमंत्री, केंद्रीय कृषि मंत्री और भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर किसानों की स्थिति से अवगत कराया है और जल्द समाधान की मांग की है।
खरीद केंद्र कम, व्यवस्थाएं अधूरी
पिछले वर्ष जहां 100 से अधिक खरीद केंद्र थे, वहीं इस बार केवल 60 केंद्र बनाए गए हैं। कई केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। जिसमें भी तोल कांटे, भंडारण और मजदूरों की कमी से हालात और खराब हैं। कई केंद्रों के बाहर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लगी हैं। केंद्रों पर किसान दिन में तेज धूप और रात में मच्छरों के बीच ट्रॉलियों में ही समय गुजार रहे हैं। उन्हें डर है कि कहीं इंतजार करते-करते उनका स्लॉट ही न निकल जाए।
भ्रष्टाचार के आरोप भी गंभीर
किसानों का आरोप है कि बिना प्रति क्विंटल 50 से 100 रुपए दिए न तो माल पास होता है और न ही पर्ची मिलती है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि अधिकारी फोन नहीं उठाते और जनप्रतिनिधि भी चुप्पी साधे हुए हैं। समस्याओं के समाधान के बजाय केवल औपचारिक बैठकों और आश्वासनों का सहारा लिया जा रहा है।
