जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस जेके पिल्लई की एकलपीठ ने धान उपार्जन केंद्र रैगवां, जिला पन्ना के केंद्र प्रभारी व समिति प्रबंधक को बड़ी राहत दी है। इसके तहत 56 लाख की वसूली पर रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को कारण बताओं नोटिस जारी कर पूछा है कि बिना उचित सुनवाई और बिना यह बताए कि इतनी बड़ी राशि का निर्धारण किस आधार पर किया गया, किसी कर्मचारी पर सीधे नागरिक दायित्व नहीं थोपा जा सकता।
दरअसल याचिकाकर्ता पन्ना निवासी बलराम उरमलिया की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, पन्ना द्वारा जारी रिकवरी नोटिस चुनौती के योग्य है। इस नोटिस में 2,375.04 क्विंटल धान की कमी बताते हुए 56 लाख 26 हजार 469 की राशि तीन दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया था, अन्यथा कठोर वसूली की चेतावनी दी गई थी। याचिकाकर्ता पिछले लगभग 20 वर्षों से सहकारी विभाग में कार्यरत हैं।
उन्हें खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के दौरान धान उपार्जन केंद्र रैगवां का अतिरिक्त प्रभार केंद्र प्रभारी के रूप में सौंपा गया था। उन्होंने शासन की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार धान की खरीदी, इलेक्ट्रानिक तौल, ई-उपार्जन पोर्टल प्रविष्टि व परिवहनकर्ता को विधिवत सुपुर्दगी की संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की थी। याचिका में यह बताया गया कि समस्त स्टाक परिवहनकर्ता को विधिवत सौंपा गया था और उसके प्राप्ति दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। कथित कमी यदि हुई भी है, तो वह परिवहन के दौरान हुई है, जिसकी जिम्मेदारी परिवहनकर्ता की बनती है।
