
रायसेन। रायसेन जिला मुख्यालय से 4 किलोमीटर दूर ग्राम मनियाखेड़ी में नरवाई (पराली) की आग खेत में बने टीनशेड तक फैल गई। इससे किसान दौलतराम पाराशर की कटी हुई गेहूं की फसल (20-25 क्विंटल), 20 टन भूसा और सिंचाई पाइपलाइन जलकर राख हो गए, जिससे उन्हें करीब डेढ़ से दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है।सूचना पर पहुंची दो दमकल गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया है, हालांकि आज शाम तक मौके पर कुछ स्थानों पर आग सुलगती रही।
दोपहर में उठी लपटें रात को खेत तक पहुंचीं–
आग की शुरुआत दोपहर में नरवाई में लगने से हुई थी, जो धीरे-धीरे फैलते हुए किसान दौलतराम पाराशर के खेत में बने टीन शेड तक जा पहुंची। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि टीन शेड में रखा गेहूं और भूसे के साथ-साथ पाइपलाइन व अन्य कृषि उपकरण भी इसकी पूरी तरह चपेट में आकर नष्ट हो गए।
जिले में 2600 के पार पहुंचे नरवाई जलाने के मामले–
रायसेन जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अब तक यह आंकड़ा 2600 के पार पहुंच चुका है। औसतन प्रतिदिन 60 से अधिक स्थानों पर नरवाई जलने की सूचनाएं प्रशासन को मिल रही हैं। पिछले एक सप्ताह में इन घटनाओं में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। 22 अप्रैल को एक ही दिन में 195 नई जगहों पर आग लगने की घटनाएं सैटेलाइट इमेज के जरिए दर्ज की गई थीं।
प्रशासन की समझाइश बेअसर, घट रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति—
शासन और प्रशासन द्वारा लगातार समझाइश देने और कार्रवाई किए जाने के बावजूद, किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए पारंपरिक और खतरनाक तरीके (नरवाई जलाने) का ही सहारा ले रहे हैं।इसके परिणामस्वरूप किसानों की फसल और कृषि उपकरणों को तो नुकसान हो ही रहा है, साथ ही पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ खेत की भूमि की उर्वरा शक्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
