चूल्हे के पास लगी चौपाल, कलेक्टर ने गाँव की खाट पर बिताई रात

उज्जैन: गजनीखेड़ी का जीवन अपने पारंपरिक ढर्रे पर चलता है, सुबह खेतों की ओर जाते किसान, दोपहर में चौपाल पर बैठक और शाम को गांव की गलियों में गूंजती मालवी बोली. ऐसे परिवेश में जब उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला सोमवार-मंगलवार की दरमियान रात बिताने इस गांव में पहुंचा, तो ग्रामीणों को लगा कि हमारी बात अब सीधे सीएम डॉ मोहन यादव तक जाएगी.

जिले के बड़नगर तहसील का छोटा-सा गांव गजनी खेड़ी इन दिनों प्रशासनिक बदलाव की नई कहानी लिख रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बाद अब अधिकारी गांवों में रात्रि विश्राम कर रहे हैं. इसी कड़ी में कलेक्टर रोशन सिंह गजनी खेड़ी पहुंचे, जहां उन्होंने किसी वीआईपी अंदाज के बजाय आम ग्रामीण की तरह जीवन जिया. कुएं के पास खाट पर सोना, खुले आसमान के नीचे रात बिताना और सुबह ग्रामीणों के बीच सहजता से उठना,यह दृश्य गांव के लोगों के लिए किसी आश्चर्य के साथ सौगात से कम नहीं था. कलेक्टर ने पूरी रात्रि यही बिताई, तो यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि व्यवस्था में उतरते बदलाव की नजीर बन गया.

समस्याएं सुनी, ग्रामीणों के साथ किया भोजन
गांव का माहौल बीती रात बिल्कुल अलग रहा. चौपाल सजी, जहां देसी बोली में समस्याएं रखी गईं, कहीं फसल बीमा की चर्चा, तो कहीं गेहूं खरीदी और मंडी की व्यवस्था पर सवाल. कलेक्टर ने हर बात ध्यान से सुनी और मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए. ग्रामीणों के साथ बैठकर भोजन करना, बच्चों को दुलारना और किसानों से खेत-खलिहान की बातें करना- इसने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को पाटने का काम किया.
कलेक्टर ने किसानों से चर्चा के दौरान फसल बीमा, नरवाई, ओलावृष्टि और मौजूदा मौसम की चुनौतियों पर विस्तार से बात की. साथ ही प्रदेश में मनाए जा रहे कृषि कल्याण वर्ष की जानकारी भी दी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया. देर रात तक जन-चौपाल चली, समस्याओं का मौके पर निराकरण हुआ.

मुख्यमंत्री स्वयं रुकते हैं रात
उज्जैन में परंपरागत रूप से रात रुकने की मनाही की किंवदंती रही है, बावजूद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद इस परंपरा को तोड़ते हुए रात्रि विश्राम कर नई पहल की शुरुआत की. अब उसी का निर्वहन करते हुए अधिकारी जमीनी स्तर पर योजनाएं उतारते नजर आ रहे हैं. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा कि हम उज्जैन के और महाकाल के बेटे हैं. हम हमारे घर रात नहीं रुकेंगे तो कहां रुकेंगे. किसी ने पूर्व में भ्रांति फैलाई है कि राजनेता रात नहीं रुक सकते यह सब मिथ्या है, उसके बाद से ही अब उक्त चर्चाओं पर विराम लग गया.

सादगी के चर्चे
कलेक्टर रोशन सिंह की यह सादगी और कार्यशैली पहले भी चर्चा में रही है,चाहे जनसुनवाई में सीधे संवाद हो या बारिश के दौरान खुद पानी में उतरकर लोगों की मदद करना. गजनीखेड़ी की यह रात उसी श्रृंखला का एक और अध्याय बन गई है. गांव की मिट्टी, वहां की बोली और जीवनशैली को करीब से समझने की यह पहल प्रशासन को कागजों से निकालकर जमीनी हकीकत तक ले जा रही है.

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