
भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला लाखों युवाओं, अभ्यर्थियों और परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार की उदासीनता बेहद चिंताजनक है।
पटवारी ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था, जिसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया था। हालांकि, यह मामला अब भी न्यायालय में लंबित है और इसका समाधान नहीं हो पाया है।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने संबंधित याचिकाओं को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को स्थानांतरित करते हुए तीन महीने के भीतर निर्णय करने के निर्देश दिए थे। “निर्धारित समय का आधा हिस्सा बीत चुका है, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता अब तक दिखाई नहीं दे रही है,” उन्होंने आरोप लगाया।
पटवारी ने सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता समेत वरिष्ठ विधि अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे सरकार की कमजोर इच्छाशक्ति का संकेत बताया। उनके अनुसार, हजारों अभ्यर्थी वर्षों से नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं और करीब सात वर्षों से ओबीसी आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।
कांग्रेस नेता ने सरकार से अगली सुनवाई में मजबूत कानूनी पक्ष रखने की मांग की और चेतावनी दी कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर लापरवाही बरतना युवाओं के साथ अन्याय होगा।
