किसान मोर्चा अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद बदले सियासी समीकरण

विंध्य की डायरी

डा. रवि तिवारी: विंध्य में भाजपा की संगठनात्मक रणनीति आगामी चुनाव को देखते हुए तय की जा रही है. किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद पर प्रवीण त्रिपाठी की नियुक्ति के बाद एक नया समीकरण बनता दिख रहा है. अध्यक्ष पद पर ब्राम्हण समाज के चेहरे को आगे लाए जाने के बाद नये सियासी समीकरण बनने शुरू हो गए हैं. दरअसल प्रवीण राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पसंद माने जा रहे हैं . संघ में प्रचारक की भूमिका का दायित्व निभा चुके हैं . संगठन का अच्छा खासा अनुभव है. नई जिम्मेदारी के साथ किसानों को पार्टी की विचारधारा से जोडऩे एवं सरकार की कृषि योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी.

किसान मोर्चा जैसे अहम संगठनात्मक मोर्च में नेतृत्व परिवर्तन से जिले में पार्टी विभिन्न मोर्चा के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है. एक बात साफ है कि यह दायित्व आगामी चुनाव को देखते हुए जातीय समीकरण का भी संतुलन कहा जा सकता है. नियुक्ति के बाद एक बात साफ हो गई है कि विंध्य में भाजपा अब मोर्चा के स्तर पर नये सिरे से समीकरण बना रही है. आने वाले समय में अन्य मोर्चा और पदों पर भी इसी तरह के बदलाव देखने को मिल सकते है. परिणाम स्वरूप जिले की सियासत में एक नई दिशा तय होगी. पार्टी सत्ता और संगठन में तालमेल बैठाने के साथ खाटी कार्यकर्ताओं के कंधों में जिम्मेदारी देने का मन बना चुकी है. किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष नियुक्ति के बाद सभी की नजरे अब आगे होने वाले संगठनात्मक विस्तार पर टिकी हुई है.

किसके सिर होगा युवा मोर्चा के अध्यक्ष का ताज
राजनीतिक नियुक्तियों के साथ विभिन्न मोर्चा पर भाजपा ने दायित्व देना शुरू कर दिया है. युवा मोर्चा अध्यक्ष पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. किसके सर अध्यक्ष का ताज होगा यह भविष्य के गर्त में है लेकिन संगठन के भीतर कई नामों पर मंथन जारी है. जिन नामो पर चर्चा चल रही है वह सभी अपने स्तर पर संगठन और नेताओं की गणेश परिक्रमा करने में लगे है. लेकिन जिस तरह से पार्टी के अंदर दायित्व दिया जा रहा है उससे लग रहा है कि संघ की प्रष्ठिभूमि वाले नाम पर ही अंतिम मुहर लगेगी. कई नामों में उम्र का रोड़ा बन रहा है लिहाजा उम्मीद कम है. कुछ नाम ऐसे है जिन पर लगभग सहमति बन चुकी है. युवा मोर्चा का अध्यक्ष भी संघ से जुड़ा होगा. जल्द ही नाम की घोषणा होने वाली है लिहाजा अध्यक्षी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. आगामी चुनाव को देखते हुए युवा चेहरे पर ही पार्टी भरोसा जाएगी.
जिलाध्यक्ष चयन पर आप में बगावत
आम आदमी पार्टी के दिन इस समय अच्छे नही चल रहे है, पार्टी संगठनात्मक कमजोरी और आपसी खींचतान से जूझती नजर आ रही है. सिंगरौली में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. हाल ही में पार्टी के प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा किये गये संगठनात्मक फेरबदल के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है. दरअसल शहर इकाई में लालबाबू कुशवाहा और ग्रामीण क्षेत्र में रतीभान प्रसाद को जिला अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले ने पार्टी के पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है.

लिहाजा फैसले के विरोध में जिला उपाध्यक्ष चरणजीत कौर एवं वरिष्ठ कार्यकर्ता अनिल शाह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जिससे पार्टी को बड़ा झटका लगा है, अंदरूनी असंतोष अब सार्वजनिक रूप ले चुका है. सिंगरौली में पार्टी की स्थिति बिगड़ रही है संगठन में बढ़ी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है. तमाम परिस्थितियों के बाद भी नेतृत्व की चुप्पी समझ से परे है. जिस तरह से से स्थिति बन चुकी है उससे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है.

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