
जबलपुर। हिन्दू समाज के परिवार के द्वारा बेटी को बंधक बनाकर रखे जाने के खिलाफ मुस्लिम युवक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के द्वारा लड़की के बयान दर्ज रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गयी। रिपोर्ट में बताया गया कि याचिकाकर्ता से युवती कोई संबंध नहीं रखना चाहती है। युवती अपने परिवार के साथ रहना चाहती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
भोपाल निवासी शाजिल शेख की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि हिन्दू परिवार की युवती उसकी दोस्त है। परिवार के सदस्यों ने उसे बंधक बनाकर रिश्तेदार के घर बैतूल भेज दिया है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा था कि ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के साथ महिला पुलिस अधिकारी सादे कपड़ों में जाये और युवती के बयान दर्ज कर रिपोर्ट पेश करें।
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बैतूल ने युवती के वयान दर्ज कर हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि युवती ने अपने बयान में कहा है कि वह स्वेच्छा से अपने मामा के घर में है। याचिकाकर्ता से वह किसी प्रकार के संबंध नही रखना चाहती है। वह माता-पिता के साथ रहना चाहती है। जिसके बाद याचिकाकर्ता की तरफ से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया। याचिकाकर्ता के आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
