गाज़ा युद्ध के बाद पहली बार नगरपालिका चुनाव, फलस्तीनियों ने किया मतदान

यरूशलम, 25 अप्रैल (वार्ता) फिलिस्तीन के पश्चिमी तट और गाज़ा पट्टी के सीमित क्षेत्रों में शनिवार को फिलिस्तीनी मतदाता नगरपालिका चुनाव में मतदान कर रहे हैं। गाज़ा युद्ध के बाद यह पहला चुनाव है।

रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी तट में लगभग 15 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, जबकि गाज़ा के दैर अल-बलह शहर में करीब 70 हजार मतदाता मतदान कर रहे हैं। यह गाज़ा का वह क्षेत्र है जहां बड़े पैमाने पर जमीनी हमला नहीं हुआ है।

ये चुनाव 19 नवंबर, 2025 को प्रकाशित नए चुनावी कानून के अनुसार आयोजित किए जा रहे हैं, जिसने दो अलग-अलग चुनावी प्रणालियां स्थापित की हैं।

करीब दो दशकों में पहली बार गाज़ा में मतदान हो रहा है। यहां अंतिम चुनाव 2006 में हुआ था, जब हमास ने जीत हासिल की थी।

इन चुनावों को फिलिस्तीनी प्राधिकरण के नेतृत्व वाले महमूद अब्बास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो गाज़ा में अपनी राजनीतिक उपस्थिति बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकांश उम्मीदवार फतह पार्टी के अंतर्गत या निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।

हमास ने आधिकारिक रूप से उम्मीदवार नहीं उतारे हैं, लेकिन कुछ उम्मीदवारों को उससे जुड़ा माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ गुट मतदान में बिल्कुल भी हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उन्हें उस नियम पर आपत्ति है जिसके तहत उम्मीदवारों के लिए फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण के समझौतों का समर्थन करना ज़रूरी है। इसमें इज़रायल को मान्यता देना भी शामिल है। हमास ने कहा कि नतीजे जो भी हों, वह उनका सम्मान करेगा। उसने गाज़ा में मतदान केंद्रों के बाहर सिविल पुलिस भी तैनात कर दी है।

कागज़ पर तो ये महज़ स्थानीय परिषद के चुनाव हैं, लेकिन इनमें राजनीतिक दांव कहीं ज़्यादा बड़े हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, ये स्थानीय निकाय चुनाव भले ही प्रशासनिक स्तर के हों, लेकिन इनके राजनीतिक निहितार्थ व्यापक हैं और भविष्य में राष्ट्रीय चुनावों का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

उनका मानना है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण वर्षों से भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है और इज़रायल द्वारा इसकी ओर से जमा किये गये कर राजस्व को रोक लिए जाने के बाद, इसे अपने ही कर्मचारियों को वेतन देने में भी काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र ने इस चुनाव प्रक्रिया को विश्वसनीय बताया है और इसे कठिन परिस्थितियों के बीच लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग का अवसर माना है।

संयुक्त राष्ट्र के संयोजक रमीज़ अलकबारोव ने चुनाव पर कहा, “शनिवार के चुनाव फ़िलिस्तीनियों के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने का एक अहम मौक़ा हैं।”

चुनाव आयोग के प्रवक्ता फरीद तामल्लाह ने कहा, “मतदान फिलिस्तीनी लोगों की अपनी ज़मीन पर बने रहने और अपने देश को विकसित करने की इच्छा को दर्शाता है।”

यूरोपीय और अरब सरकारें बड़े पैमाने पर इस विचार का समर्थन करती हैं कि फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण अंततः गाज़ा का शासन संभालने के लिए वापस लौटे और एक फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना हो। इज़रायल की सरकार इससे असहमत है, क्योंकि वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने साफ़ तौर पर कहा है कि उनका इरादा फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के विचार को खत्म करते रहने का है।

 

 

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