सीहोर। जिले में संचालित यात्री बसों की हालत इन दिनों गंभीर चिंता का विषय बन गई है। जहां एक ओर भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और आगजनी की घटनाओं का खतरा बढ़ गया है, वहीं दूसरी ओर बसों में यात्रियों की सुरक्षा के इंतजाम सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गए हैं. हाल ही में यातायात विभाग द्वारा की गई सघन जांच में जो तस्वीर सामने आई, वह चौंकाने वाली ही नहीं बल्कि भयावह भी है.
हाल ही में यातायात अमले ने पांच यात्री बसों की जांच की, लेकिन इनमें एक भी बस ऐसी नहीं मिली जिसमें फायर सेफ्टी सिस्टम सही स्थिति में हो. कई बसों में लगे फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके थे, तो कुछ पूरी तरह निष्क्रिय पाए गए. हैरानी की बात यह रही कि कुछ बसों में तो फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद ही नहीं थे. ऐसे हालात में अगर किसी बस में आग लगने जैसी आपात स्थिति बनती है, तो यात्रियों की जान बचाना बेहद मुश्किल हो सकता है.
जांच के दौरान नियमों की अनदेखी का एक और गंभीर मामला सामने आया. कई बसें बिना वैध परमिट के ही सड़कों पर दौड़ती पाई गईं. यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ भी है। यातायात अमले ने बस संचालकों और चालकों को सख्त निर्देश दिए कि वे अपने वाहनों में फायर सेफ्टी सिस्टम को दुरुस्त करें और सभी जरूरी दस्तावेज पूरे रखें. बिना परमिट चल रही बसों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
हालांकि, जमीनी सच्चाई कुछ और ही कहानी बयां करती है. जांच और चेतावनी के बावजूद कई बसें बिना किसी सुधार के पहले की तरह ही सड़कों पर दौड़ रही हैं. इससे साफ जाहिर होता है कि न तो बस संचालकों को नियमों का डर है और न ही यात्रियों की सुरक्षा की कोई चिंता.
जिला मुख्यालय से प्रतिदिन करीब 250 से अधिक बसों का संचालन होता है. इनमें से कई बसें बेहद पुरानी और जर्जर हालत में हैं. इन बसों में न तो फस्र्ट एड बॉक्स उपलब्ध हैं और न ही स्पीड गवर्नर जैसी जरूरी सुरक्षा व्यवस्थाएं. श्यामपुर, इछावर और आगर मार्ग पर चलने वाली कई बसें तो ऐसी हैं जिनकी फिटनेस भी संदेह के घेरे में है.
इतना ही नहीं, आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं जैसे सीसीटीवी कैमरे और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी अधिकांश बसों में नदारद हैं. इन सुविधाओं की अनुपस्थिति यात्रियों की सुरक्षा को और भी कमजोर बना देती है.
कुल मिलाकर, सीहोर जिले में यात्री बसों की स्थिति एक बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही है. जरूरत है कि प्रशासन केवल जांच और निर्देशों तक सीमित न रहकर सख्त कार्रवाई करे, ताकि यात्रियों का सफर सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके. अभी के हालात को देखकर यही कहा जा सकता है कि यहां सफर करना कहीं न कहीं जोखिम उठाने जैसा है.
बस का फिटनेस और परमिट ही नहीं
जांच के दौरान एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक घटना भी सामने आई. जब यातायात अमले ने एक बस को रोका और चालक से दस्तावेज मांगे, तो उसके पास फिटनेस और परमिट से जुड़े कागजात नहीं थे. बाद में बस स्टाफ दस्तावेज लेकर आया. जब उनसे फायर सेफ्टी सिस्टम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने लापरवाही भरा जवाब देते हुए कहा कि सर, इसका उपयोग तो हम करते नहीं हैं, शायद रखे-रखे गैस उड़ गई होगी, अब नया खरीद लेंगे. इस जवाब पर सूबेदार ब्रजमोहन धाकड़ ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई और फायर सेफ्टी की अहमियत समझाई.
नियमित जारी रहेगी चैकिंग
हमारे द्वारा अक्सर व नियमित चैकिंग अभियान चलाया जाता है. कमियां पाए जाने पर चालानी कार्रवाई की जाती है और स्टाफ को यातायात नियमों का पालन करने की समझाईश भी दी जाती है. सभी बस चालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह कागज पूरे रखें.
बृजमोहन धाकड़,
यातायात प्रभारी
