इंदौर: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत पेंशन प्राप्त करने वाले बुजुर्गों में से हजारों बुजुर्गों की पेंशन बंद हो गई है. इंदौर नगर निगम द्वारा ई-केवाईसी नहीं करने के कारण इन बुजुर्गों की पेंशन रोक दी गई है. जबकि पार्षद और अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं. बहुत से बुजुर्ग अपनी पेंशन की राशि नहीं आने के कारण कभी नगर निगम के जोनल कार्यालय तो कभी पार्षद के कार्यालय पर चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं.
ऐसे बहुत से बुजुर्ग नगर निगम मुख्यालय तक भी पहुंचते हैं, लेकिन कोई भी उन्हें यह जवाब देने की स्थिति में नहीं रहता है कि आखिर उनकी पेंशन की राशि उनके खाते में क्यों नहीं आ रही है. पार्षद के कार्यालय से इन बुजुर्गों को यह कहकर रवाना कर दिया जाता है कि जोनल कार्यालय पर जाकर मालूम करो कि पेंशन कैसे रुक गई? जब बुजुर्ग जोनल कार्यालय पर पहुंचते हैं तो वहां पर कहा जाता है कि मुख्यालय पर जाकर मालूम करो कि पेंशन क्यों रुकी है? यह बुजुर्ग जब मुख्यालय पर जाते हैं तो वहां पर उन्हें जवाब देने वाला कोई नहीं होता है.
पेंशन को लेकर पूरे शहर के हितग्राही परेशान हैं. इसी तरह खजराना क्षेत्र के सिकंदराबाद कॉलोनी में भी वृद्धा पेंशन योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक नजर आ रही है. क्षेत्र में 61 से 80 वर्ष आयु वर्ग के कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जिन्हें आज तक पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है, वहीं कुछ हितग्राहियों की पेंशन बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद कर दी गई है, जिससे उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि जानकारी के अभाव और प्रक्रियाओं की जटिलता के चलते कई पात्र बुजुर्ग योजना से वंचित हैं. कई बार आवेदन और दस्तावेज जमा करने ओर ई-केवायसी कराने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है. बुजुर्गों का आरोप है कि संबंधित विभाग ध्यान नहीं दे रहा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं. क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वे कर सभी पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाया जाए और बंद पेंशन को जल्द शुरू किया जाए.
यह बोले पेंशन हितग्राही
मैं 78 वर्ष का हूं. एक साल पेंशन मिली और एक वर्ष से पेंशन बंद है. सारे कागजात एक बार फिर पानी की टंकी पर जमा करके आया हूं, चक्कर लगा-लगाकर थक गया हूं. सब टालने का काम कर रहे हैं.
– अलाउद्दीन खान
मैं 65 वर्ष का हो चुका हूं, पढ़ा-लिखा नहीं हूं, जिसके चलते मुझे इसकी प्रक्रिया नहीं पता. अधिकारी भी नहीं बताते, अगर क्षेत्रीय पार्षद सहयोग करें तो मैं भी पेंशन का लाभ ले सकता हूं.
-अब्दुल कय्यूम अंसारी
मुझे 600 रुपए पेंशन मिलती है. थोड़ा बहुत हाथ खर्चा मिल जाता है, कुछ जरूरतें पूरी हो जाती है. सरकार से निवेदन है कि जिन बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिली उन्हें भी इसका लाभ दिया जाए.
– बाबू खां
