नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (वार्ता) पश्चिम एशिया संकट के बीच बजाज फिनसर्व एएमसी ने निवेशकों को एक ही तरह की परिसंपत्तियों की बजाय विविध परिसंपत्तियों (मल्टी-एसेट) में निवेश की सलाह दी है। बजाज फिनसर्व एसेट मैनेजमेंट के प्रमुख (इक्विटी) सौरभ गुप्ता ने कहा कि इस माहौल में लार्ज-कैप इक्विटी आकर्षक वैल्यूएशन और अस्थिर परिस्थितियों में स्थिरता प्रदान करती है। साथ ही, ‘मल्टी-एसेट रणनीति’ भू-राजनीतिक और कॅमोडिटी से जुड़ी अनिश्चितता के बीच झटकों को सहने में मददगार हो सकती है। उन्होंने स्मॉल-कैप में निवेश करने वालों को अल्पावधि की अस्थिरता से निपटने के लिए अनुशासित एसआईपी की सलाह दी है। बजाज फिनसर्व एएमसी का कहना है कि कॉर्पोरेट आय मजबूत बनी हुई है। निफ्टी-500 के मुनाफे में वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में साल-दर-साल 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी। उसने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण कम समय के लिए आय पर थोड़ा दबाव पड़ सकता है, लेकिन दूसरी छमाही में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
उसका कहना है कि मार्च में पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से संबंधित बाधाओं के कारण बाजार में अस्थिरता देखी गयी। लेकिन हालिया युद्धविराम ने बाजारों को दोबारा वृद्धि हासिल करने में मदद की है। अब तनाव कम होने के साथ कच्चा तेल और बाहरी कारकों के स्थिर होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू विकास के कारकों को फिर से मजबूती मिल सकेगी। बजाज फिनसर्व एएमसी के फिक्स्ड इनकम प्रमुख सिद्धार्थ चौधरी ने बताया कि हालांकि कच्चा तेल केंद्र में बना हुआ है, लेकिन विकास दर पर जोखिम और नियंत्रित कोर मुद्रास्फीति के कारण आरबीआई के पास इंतजार करो और देखो की रणनीति अपनाने का समय है। उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि फिक्स्ड इनकम बाजार अब उस चरण में प्रवेश कर रहे हैं जहां यील्ड की स्थिरता क्षणिक वैश्विक झटकों की बजाय घरेलू बुनियादी कारकों से अधिक प्रभावित होगी।”
उन्होंने कहा कि बॉन्ड बाजार में धीमी होती विकास दर अब यील्ड के लिए मुख्य आधार बनती जा रही है, जिससे निकट भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हो गयी है। आरबीआई का ध्यान अब आक्रामक नीतिगत सख्ती की बजाय तरलता प्रबंधन और वित्तीय स्थितियों को स्थिर करने की ओर ज्यादा है, और इसलिए वह इंतजार करने की रणनीति अपना रहा है। कंपनी के नोट में कहा गया है कि भविष्य का नजरिया अभी भी तेल की कीमतों और भू-राजनीति पर टिका है। ऊंची कीमतें और लगातार तनाव के कारण अस्थिरता जारी रह सकती है। हालांकि, जोखिमों में कमी आने पर जल्द ही एक अनुकूल माहौल बन सकता है, जिसमें स्थिर मुद्रास्फीति और पर्याप्त तरलता शामिल होगी।

