जबलपुर। सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ को बताया गया कि विधायक निर्मला सप्रे के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत कार्यवाही किये जाने संबंधित आवेदन की सुनवाई विधानसभा अध्यक्ष द्वारा 22 अप्रैल को निर्धारित की गयी है। विधायक निर्मला सप्रे विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगी। सरकार के जवाब को रिकॉर्ड में लेते हुए युगल पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 29 अगस्त को निर्धारित की है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की तरफ से हाईकोर्ट में दल-बदल कानून के तहत कांग्रेस की बीना से विधायक निर्मला सप्रे का निर्वाचन शून्य करने की मांग की है। याचिका में कहा गया था कि उन्होंने 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष तोमर के समक्ष इस मामले में याचिका दायर की थी। लेकिन निर्धारित 90 दिन के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की गई। लिहाजा, हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।
याचिका में कहा गया था कि विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी विरोध गतिविधियों में लिप्त थी। लोकसभा चुनाव के दौरान पांच मई, 2024 को राहतगढ़ में मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के कार्यक्रम में मंच पर पहुंची थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि कांग्रेस विधायक सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने विधायक पद से त्यागपत्र नहीं दिया है। दलबदल कानून के प्रकाश में उनका यह रवैया गैर कानूनी है। इसलिए सदस्यता समाप्त की जानी चाहिए।
याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि विधानसभा अध्यक्ष ने दायर आवेदन पर 9 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित की है। विस अध्यक्ष किसी याचिका पर निर्णय न ले लें, तब तक हाई कोर्ट को पुनरीक्षण का अधिकार नहीं है। याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बताया गया कि विधानसभा अध्यक्ष विगत 9 अप्रैल को किन्ही कारणों से मामले की सुनवाई नहीं कर पाये थे। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गयी है। युगल पीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किये।
