दिनदहाड़े बैंक डकैती: आरपीएफ की तेजी के सामने सिंगरौली पुलिस की सुस्ती बेनकाब

सिंगरौली: दिनदहाड़े हुई डकैती ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैंक में घुसकर बंदूक की नोक पर लूट की वारदात को अंजाम दिया गया और आरोपी बेखौफ तरीके से फरार हो गए, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। घटना के बाद भी जिस तत्परता की उम्मीद थी, वहां सुस्ती और लापरवाही साफ नजर आई।फिलहाल आरपीएफ ने बिहार से एक आरोपी को गिरफ्तार किया और सिंगरौली पुलिस को सुपुर्द किया। जहां रविवार को न्यायालय में पेश किया गया और पुलिस को 8 दिन की रिमांड मिली है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि आरोपियों की फोटो जारी करने में पुलिस को करीब 6 घंटे का समय लग गया।

यह देरी केवल एक चूक नहीं, बल्कि पूरे सूचना तंत्र की नाकामी को उजागर करती है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस वजह से इतनी देर हुई , क्या पुलिस के पास तत्काल कार्रवाई का कोई प्रभावी सिस्टम नहीं है या फिर जिम्मेदारी से बचने का खेल चल रहा है। इसी बीच जिस कार्रवाई की जिम्मेदारी सिंगरौली पुलिस पर थी, उसे रेलवे सुरक्षा बल ने अंजाम दिया। मुख्य आरोपी को बिहार के डेहरी ऑन सोन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे सिंगरौली लाया गया और अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 8 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है। आरपीएफ की इस तेजी ने स्थानीय पुलिस की सुस्ती को और ज्यादा उजागर कर दिया है।

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के बड़े अधिकारी भी हरकत में आए। डीजीपी, आईजी और डीआईजी ने सिंगरौली में डेरा डालकर हालात की समीक्षा की और अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब शीर्ष स्तर के अधिकारी मौके पर मौजूद थे, तब भी शुरुआती कार्रवाई में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। फिलहाल इस मामले में चार अन्य आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश देने का दावा कर रही हैं, लेकिन शुरुआती ढिलाई के कारण आरोपियों को भागने का पूरा मौका मिल गया। यही वजह है कि अब आम जनता के बीच पुलिस की कार्यशैली को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। इस घटना ने राजनीतिक माहौल को भी गर्मा दिया है। विपक्षी दल भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पुलिस प्रशासन पर हमलावर हैं। उनका साफ कहना है कि यह केवल एक डकैती नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की विफलता का उदाहरण है, जहां अपराधी बेखौफ हैं और पुलिस सिर्फ बाद में सक्रिय होती है।
पूछताछ जारी, पुलिस की सुस्ती पर बड़े सवाल कायम
आरोपी से पूछतांछ जारी है, लेकिन पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे। आरोपी से आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर के अधिकारी गहन पूछतांछ कर रहे हैं, फिर भी शुरुआती सुस्ती और लापरवाही की भरपाई होती नहीं दिख रही। घटना के वक्त पुलिस की निष्क्रियता ने अपराधियों को खुला मौका दिया, जिसका खामियाजा अब पूरी व्यवस्था को भुगतना पड़ रहा है। सवाल साफ है जब समय पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अब पूछतांछ से क्या हासिल होगा, जनता जवाब चाहती है और जिम्मेदारी तय होना बाकी है।

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