सतना : रविवार की शाम सतना रेलवे स्टेशन परिसर के जिस क्षेत्र में भीषण आग भडक़ी वहां से अप लाइन की दूरी महज चंद कदमों की थी. आलम यह रहा कि एक ओर जहां आग की विकरालता फैलती जा रही थी, वहीं दूसरी ओर चंद कदमों की दूरी से गुजर रही ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच दहशत फैली हुई थी. हलांकि गनीमत इस बात की रही कि आग के प्लेटफार्म की ओर बढऩे से पहले ही नियंत्रित करते हुए बड़ा हादसा टाल दिया गया.
लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि रेल प्रबंधन द्वारा 12 वर्ष बाद भी किसी तरह का सबक लेने का प्रयास नहीं किया गया है.प्राप्त जानकारी के अनुसार रविवार की शाम लगभग 6 बजे अंधेरी पुलिया और प्लेटफार्म क्र. 1 के बीच स्थित क्षेत्र में अचानक आग लग गई. सूखी गर्मी और हवाओं के मेल से आग बढऩे लगी और देखते ही देखते उसकी लपटें रेलवे ट्रैक से ऊपर उठती नजर आने लगीं. उक्त क्षेत्र में डंप किया जाने वाला कचरा, सूखी घास-झाडिय़ों का ढेर और डीजल सप्लाई करने वाली पाइपलाइन से होने वाले लीकेज ने घटना को और भी भयावह करना शुरु कर दिया.
हलांकि आग लगने की घटना की जानकारी मिलते ही एक केबिन की ओर तैनात स्टॉफ द्वारा फौरन ही घटना की सूचना दे दी गई. जिसके चलते रेलवे स्टेशन में ऑपरेशन विभाग में तैनात अमला सक्रिय हो गया. आनन-फानन में पोर्टबल अग्रिशमन उपकरणों की मदद से आग को नियंत्रित करने का प्रयास शुरु किया गया. लेकिन आग की भयानकता के सामने यह सारे प्रयास नाकाफी साबित होते नजर आए. जिसके चलते तत्काल घटना की सूचना नगर निगम के दमकल विभाग को दे दी गई. वहीं कुछ देर बाद ही आरपीएफ और जीआरपी अमला भी मौके पर पहुंच गया और आस पास मौजूद लोगों को दूर हटाया जाने लगा.
इसी दौरान हवा का रुख रेलवे ट्रैक की ओर भी हुआ. जिसके चलते आग बढ़ते हुए रेलवे ट्रैक की ओर जाने लगी. घटनाक्रम के दौरान अप रेलवे ट्रैक से कुछ यात्री और गुड्स ट्रेनें भी गुजरीं. लिहाजा वहां से गुजरने के दौरान लोको पायलट सहित रेल यात्रियों के चेहरों पर आग की भयावहता का डर साफ नजर आ रहा था. हलांकि दमकल के पहुंचने से पहले रेल कर्मियों द्वारा उपलब्ध सीमित संसाधनों के जरिए आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता रहा.
लेकिन बढ़ती आग की लपटों को देखते हुए रेलवे स्टेशन तक किसी अनहोनी की आशंका स्पष्ट दिखाई देती रही. दमकल वाहन के साथ मौके पर पहुंचे फायर फाइटर्स ने बिना देरी किए रेस्क्यू शुरु कर दिया. दमकल कर्मियों ने लगभग आधे घंटे तक कड़ी मशक्कत करने के बाद किसी तरह आग को नियंत्रित कर लिया. हलांकि इसके बाद भी आस पास के क्षेत्र में कचरे और झाडिय़ों में आग सुलगती रही, लेकिन धीरे धीरे उसकी तासीर मंद पड़ चुकी थी. जिसके चलते स्थानीय रेल प्रबंधन द्वारा राहत की सांस ली गई. लेकिन लगभग 2 घंटे तक चले घटनाक्रम के दौरान रेल कर्मियों, यात्रियों और राहगीरों की सांसे अटकी रहीं.
12 वर्ष बाद भी नहीं लिया सबक
12 वर्ष पहले रेलवे के तेल डिपो के निकट भयंकर आग लगने की घटना सामने आई थी. हलांकि आग सूखी घास और झाडिय़ों से शुरु हुई थी. लेकिन तेल डिपो से सप्लाई होने वाली पाइप लाइन के लीकेज के चलते वहां पर जमा डीजल ने मामले को काफी भयावह बना दिया था. आलम यह था कि आग की लपटें 100 फीट से ऊपर पहुंचने लगी थीं और आग के तेल डिपो तक पहुंचने का खतरा मंडरा रहा था. हलांकि रेल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत करते हुए उस गंभीर हादसे का टाल दिया था. लेकिन इसके बावजूद तेल डिपो के निकट स्थित मैदान से लेकर अंधेरी पुलिया और प्लेटफार्म क्र. 1 के निकट तक के क्षेत्र में आग लगने की गंभीर घटनाएं समय समय पर सामने आती रही हैं. बावजूद इसके रेल प्रबंधन न तो पिछले 12 वर्ष में तेल पाइप लाइन के लीकेज को दुरुस्त कर पाया और न ही किसी तरह के सुरक्षात्मक उपाय किए गए.
टनों में डंप रहता है कचरा
रेलवे स्टेशन से निकलने वाला सारा कचरा प्लेटफार्म क्र. 1 के बगल में स्थित खाली क्षेत्र में फेंक दिया जाता है. जिसमें से अधिकांश अत्यंत ज्वलनशील प्लास्टिक होता है. यहां तक कि कालोनी से निकलने वाले कचरे की काफी मात्रा को भी यहीं पर डंप कर दिया जाता है. स्थानीय रेल प्रबंधन के पास कचरा प्रबंधन का ठोस विकल्प न होने के कारण उक्त स्थान पर टनों कचरा जमा हो जाता है. इसके अलावा सूखी झाडिय़ों और घास की अधिकता भी वहां बनी रहती है. रही सही कसर तेल के पाइप लाइनों से लीक होने वाले डीजल के नालियों के जरिए वहां पहुंचकर एकत्र होते रहने से पूरी हो जाती है. इसी कड़ी में उक्त क्षेत्र में एकत्र होने वाले असमाजिक तत्वों की महत एक शरारत रेलवे के लिए किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है
